ईरान-इजरायल युद्ध पर यूएई के पूर्व राजनयिक का बड़ा बयान, बोले– पीएम मोदी का एक फोन करा सकता है समाधान

ईरान-इजरायल युद्ध पर यूएई के पूर्व राजनयिक का बड़ा बयान, बोले– पीएम मोदी का एक फोन करा सकता है समाधान

ईरान–इजरायल युद्ध के बीच UAE के पूर्व राजनयिक हुसैन हसन मिर्जा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का एक फोन कॉल शांति की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष भारत और उसके नेतृत्व पर भरोसा करते हैं।

New Delhi: मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच जारी हमलों के कारण क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर वैश्विक राजनीति तथा सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पूर्व राजनयिक हुसैन हसन मिर्जा ने इस युद्ध को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।

भारत में यूएई के पहले राजदूत रह चुके हुसैन हसन मिर्जा का मानना है कि अगर इस संघर्ष को रोकने के लिए कोई प्रभावी पहल हो सकती है तो उसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका अहम हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का एक फोन कॉल इस संकट को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

यूएई के पूर्व राजनयिक ने क्यों जताई उम्मीद

एक इंटरव्यू में हुसैन हसन मिर्जा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खाड़ी क्षेत्र के नेताओं के बीच काफी सम्मान मिलता है। उनका कहना है कि यह सम्मान केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि क्षेत्र की जनता और बिजनेस कम्युनिटी में भी उनके प्रति विश्वास है।

मिर्जा के अनुसार यह भरोसा दोनों पक्षों तक फैला हुआ है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में अगर भारत की ओर से कोई पहल होती है तो वह शांति स्थापित करने की दिशा में प्रभावी साबित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि कई बार कूटनीति में औपचारिक बातचीत से ज्यादा प्रभाव व्यक्तिगत भरोसे और संवाद का होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत दोनों देशों के नेताओं को समाधान की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित कर सकती है।

‘एक फोन कॉल से हो सकता है समाधान’

मिर्जा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का एक फोन कॉल ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इस विवाद को खत्म कराने में मदद कर सकता है। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई नेता भारत के साथ मजबूत संबंध रखते हैं और भारत की भूमिका को संतुलित तथा भरोसेमंद मानते हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब संघर्ष बढ़ता जा रहा है तब ऐसे किसी भी नेता की पहल महत्वपूर्ण हो सकती है जिसे दोनों पक्ष सम्मान देते हों। मिर्जा के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री ऐसे नेताओं में शामिल हैं जिनकी बात को गंभीरता से सुना जा सकता है।

यूएई की स्थिति क्या है

मिर्जा ने यह भी साफ किया कि संयुक्त अरब अमीरात इस संघर्ष में सीधे शामिल होने की इच्छा नहीं रखता है। उनका कहना है कि यूएई किसी भी पक्ष को अपने क्षेत्र का इस्तेमाल सैन्य हमलों के लिए करने की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने कहा कि यूएई की स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि वह भौगोलिक रूप से ईरान का पड़ोसी है और साथ ही अब्राहम समझौते (Abraham Accords) के तहत इजरायल के साथ भी उसके संबंध हैं।

इसी कारण यूएई इस पूरे मामले में संतुलित रुख बनाए रखना चाहता है। मिर्जा के अनुसार यूएई का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और संघर्ष को फैलने से रोकना है।

क्यों बढ़ा ईरान-इजरायल तनाव

ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सैन्य तनाव रहा है। हाल के दिनों में यह तनाव और बढ़ गया जब ईरान की ओर से इजरायल पर हमले किए गए। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

इन हमलों के कारण मध्य पूर्व के कई देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

युद्ध का मौजूदा हाल

रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल की सेना ने हाल ही में ईरान के मध्य क्षेत्र में नए हमले किए हैं। इसके साथ ही लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।

इन हमलों के कारण कई सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा है और जान-माल का नुकसान भी बढ़ता जा रहा है। स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष थमने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।

बढ़ता जा रहा है जान-माल का नुकसान

ईरान के संयुक्त राष्ट्र (UN) में राजदूत के अनुसार इस संघर्ष में अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा हजारों लोग घायल हुए हैं। इस संघर्ष में अन्य देशों के सैनिक भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के सात सैनिकों की भी इस युद्ध में मौत हो चुकी है। बढ़ती मौतों और हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

क्या भारत निभा सकता है बड़ी भूमिका

भारत का मध्य पूर्व के कई देशों के साथ मजबूत संबंध है। भारत ईरान और इजरायल दोनों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते बनाए रखता है। इसी कारण कई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत इस संघर्ष को कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। हालांकि अभी तक भारत ने इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से किसी मध्यस्थता की घोषणा नहीं की है। लेकिन यूएई के पूर्व राजनयिक के बयान के बाद यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि अगर भारत पहल करता है तो इससे शांति वार्ता की संभावना बढ़ सकती है।

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