UN में भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक की कड़ी आलोचना की। भारत के प्रतिनिधि Harish P ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और United Nations चार्टर का उल्लंघन बताया।
New Delhi: संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने नजर आए। अफगानिस्तान के इलाके में पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने इन एयरस्ट्राइक की तीखी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत के प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने इस मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के इलाके में किए गए हवाई हमलों से बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान गई है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। भारत का कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करती है।
अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की भारत ने की निंदा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि अफगानिस्तान के इलाके में पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमले स्वीकार्य नहीं हैं। भारत के प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु देश की सीमा में इस तरह की सैन्य कार्रवाई करना वैश्विक नियमों के खिलाफ है। भारत का मानना है कि ऐसे कदम क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं।
पर्वतनेनी ने यह भी कहा कि इस तरह के हमलों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ता है, जो पहले से ही कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं।
पाकिस्तान को बताया ‘पाखंडी’
भारत के प्रतिनिधि ने अपने बयान में पाकिस्तान के रवैये को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने के दौरान सैन्य कार्रवाई करते समय अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामिक एकता की बात करना पाखंड है।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और सहयोग की बात करता है, जबकि दूसरी ओर ऐसे कदम उठाता है जो क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं।
पर्वतनेनी ने कहा कि इस तरह के दोहरे रवैये से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गलत संदेश जाता है और इससे भरोसा कमजोर होता है।
आम नागरिकों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान के दौरान यह भी कहा कि अफगानिस्तान में हुई सैन्य कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान में सहायता मिशन यानी UNAMA के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 6 मार्च 2026 तक कम से कम 185 निर्दोष नागरिकों की मौत हो चुकी है। इन मृतकों में लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
इसके अलावा इस सैन्य कार्रवाई के कारण एक लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। भारत का कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
ट्रेड और ट्रांजिट पाबंदियों पर भी चिंता
भारत ने अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के दौरान एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि अफगानिस्तान जैसे जमीन से घिरे देश के लिए व्यापार और परिवहन मार्ग बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। भारत ने चिंता जताई कि ट्रेड और ट्रांजिट रूट पर लगाई गई पाबंदियों के कारण अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पर्वतनेनी ने कहा कि किसी देश को व्यापारिक रास्तों से वंचित करना या उसकी पहुंच को मनमाने तरीके से रोकना अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ है। भारत का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से जमीन से घिरे विकासशील देशों की कमजोरियां और बढ़ जाती हैं।
‘ट्रेड और ट्रांजिट टेररिज्म’ पर भारत की चिंता
भारत ने अपने बयान में एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ देश व्यापार और परिवहन मार्गों का इस्तेमाल दबाव बनाने के साधन के रूप में करते हैं। भारत ने इसे ‘ट्रेड और ट्रांजिट टेररिज्म’ करार देते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
पर्वतनेनी ने कहा कि किसी देश को व्यापारिक पहुंच से वंचित करना विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के भी खिलाफ है। इसके साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन है।
अमेरिका के विदेश मंत्री का बयान
इस पूरे मुद्दे के बीच अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि तालिबान अब भी आतंकवादी तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। उनके अनुसार तालिबान कई मामलों में लोगों का अपहरण कर फिरौती मांगता है और कई बार नीतिगत रियायतें हासिल करने के लिए दबाव बनाता है। मार्को रुबियो ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को खत्म करना जरूरी है क्योंकि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है और आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
अफगानिस्तान की स्थिति पर बढ़ी वैश्विक चिंता
अफगानिस्तान में सुरक्षा और मानवीय स्थिति को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में देश में राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता लगातार बनी रही है। अब पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य कार्रवाई के कारण हालात और जटिल होते जा रहे हैं। भारत का मानना है कि इस स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर प्रयास करना चाहिए।











