एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रह सकती है। नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 8 फीसदी अनुमानित है, जबकि दूसरी छमाही में आर्थिक रफ्तार कुछ धीमी रहने के संकेत मिले हैं।
GDP Growth: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का पहला अग्रिम अनुमान जारी कर दिया है। इसके अनुसार देश की अर्थव्यवस्था के 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना जताई गई है। वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 फीसदी रही थी। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर बाहरी मांग और वित्तीय अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता की ओर इशारा करता है।
यह अग्रिम अनुमान आगामी आम बजट (Union Budget) की बुनियाद बनता है, इसलिए नीति निर्धारण, राजकोषीय प्रबंधन और बाजार की धारणा के लिहाज से इसे काफी अहम माना जा रहा है।
वास्तविक और नॉमिनल जीडीपी के बीच ऐतिहासिक रूप से कम अंतर
एनएसओ के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) वृद्धि 8 फीसदी रहने की संभावना है। यह कोविड से प्रभावित वित्त वर्ष 2021 के बाद सबसे धीमी नॉमिनल वृद्धि मानी जा रही है। खास बात यह है कि नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी वृद्धि के बीच अंतर सिर्फ 60 आधार अंक रह गया है, जो वित्त वर्ष 2011-12 के बाद सबसे कम है।
इसका मुख्य कारण जीडीपी डिफ्लेटर (GDP Deflator) का बेहद निचले स्तर पर होना है। अनुमान के मुताबिक जीडीपी डिफ्लेटर सिर्फ 0.5 फीसदी है, जो बीते पांच दशकों के सबसे निचले स्तरों में शामिल है। इसका सीधा मतलब यह है कि कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रही है और महंगाई (Inflation) का दबाव कम हुआ है।
दूसरी छमाही में ग्रोथ की रफ्तार धीमी
अगर पूरे वित्त वर्ष को दो हिस्सों में देखा जाए तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 फीसदी रहने का अर्थ यह है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही यानी अक्टूबर से मार्च के दौरान वृद्धि दर घटकर 6.9 फीसदी रह सकती है। इसके मुकाबले पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी रही थी।
यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधियों में कुछ हद तक नरमी आई है। एनएसओ ने अपने पहले अग्रिम अनुमान में दिसंबर महीने तक के चुनिंदा हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स (High Frequency Indicators) और अक्टूबर-नवंबर के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़ों को शामिल किया है। फरवरी से लागू होने वाले नए आधार वर्ष 2022-23 के साथ इन अनुमानों में आगे चलकर संशोधन संभव है।
जीवीए ग्रोथ और कर संग्रह की तस्वीर
वित्त वर्ष 2026 में सकल मूल्य वर्धन (GVA) के 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। इसका अर्थ है कि शुद्ध अप्रत्यक्ष करों (Net Indirect Taxes) का योगदान मामूली लेकिन सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि 8 फीसदी की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि सरकार के बजट अनुमान 10.1 फीसदी से काफी कम है।
इसके बावजूद राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को जीडीपी के 4.4 फीसदी पर सीमित रखने में सरकार को ज्यादा कठिनाई नहीं होने की उम्मीद जताई जा रही है। महंगाई में नरमी के चलते चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पहली छमाही में यह 8.8 फीसदी थी।
आर्थिक विशेषज्ञों की राय
एचडीएफसी बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का मानना है कि इन आंकड़ों से किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले 27 फरवरी को जारी होने वाली नई जीडीपी सीरीज का इंतजार करना बेहतर होगा। उनके अनुसार फिलहाल ये अनुमान इसलिए अहम हैं क्योंकि इन्हीं के आधार पर बजट के आंकड़े तय किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ में कमी, आयकर (Income Tax) में राहत और जीएसटी (GST) दरों में कटौती के कारण कर संग्रह पर असर पड़ा है। इसके चलते सरकार की राजस्व प्राप्तियों में करीब 1.5 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपये तक की कमी हो सकती है। हालांकि खर्च में कुछ कटौती और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिलने वाला डिविडेंड इस कमी की भरपाई में मदद कर सकता है।
कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में धीमी गति
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सांख्यिकी मंत्रालय ने दूसरी छमाही में व्यापक सुस्ती को स्वीकार किया है। कृषि क्षेत्र ने पहली छमाही में 3.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी, लेकिन पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए कृषि ग्रोथ 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है।
विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र की बात करें तो पहली छमाही में यह 8.4 फीसदी की दर से बढ़ा था, जबकि पूरे साल के लिए 7 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। श्रम-गहन निर्माण (Labour Intensive Construction) क्षेत्र में भी इसी तरह की तस्वीर है, जहां पहली छमाही में 7.4 फीसदी और पूरे वर्ष के लिए 7 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है।
सेवा क्षेत्र और निवेश मांग से सहारा
सेवा क्षेत्र (Services Sector) अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में सेवा क्षेत्र के 9.1 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि पहली छमाही में यह 9.3 फीसदी बढ़ा था। निवेश मांग को दर्शाने वाला सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) 7.8 फीसदी की दर से बढ़ सकता है, जिसे सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (Capex) से समर्थन मिलने की उम्मीद है।
निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) के 7 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो पहली छमाही के 7.5 फीसदी से कम है। वहीं सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE) 5.2 फीसदी तक बढ़ सकता है, जो राज्य सरकारों के बढ़ते खर्च को दर्शाता है।
वित्त वर्ष 2026 में निर्यात (Exports) के 6.4 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 6.3 फीसदी था। मजबूत सेवा निर्यात और स्थिर वस्तु निर्यात से वैश्विक शुल्क अनिश्चितताओं का असर सीमित रहने की उम्मीद है।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि आने वाले वर्षों में नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी ग्रोथ की दिशा अलग हो सकती है। उनके अनुसार नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ अपने दीर्घकालिक औसत 10.5 से 11 फीसदी की ओर बढ़ सकती है, जबकि वास्तविक जीडीपी ग्रोथ घटकर लगभग 6.7 फीसदी रह सकती है। इंडिया रेटिंग्स के पारस जसराय को वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.9 फीसदी रहने की उम्मीद है।












