केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान को मजबूत किया और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज सभी दिशाओं में बुलंद रहे।
नई दिल्ली: गुजरात में बृहस्पतिवार को एक ऐतिहासिक अवसर पर गुजराती भाषा में आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का विमोचन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शंकराचार्य के योगदान और भारत की ज्ञान परंपरा को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने न केवल भारत की पहचान स्थापित की, बल्कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में बुलंद किया।
केंद्रीय गृह मंत्री का संबोधन
विमोचन के बाद शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा,
'आदि शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को फैलाया और ज्ञान की परंपरा को संरक्षित किया। उनके जीवन और कार्यों से आज के युवा प्रेरणा ले सकते हैं। यह ग्रंथावली 15 संस्करणों में प्रकाशित हुई है, जो उन्हें शंकराचार्य के विचारों और जीवन दर्शन को समझने में मदद करेगी।'
शाह ने कहा कि उस समय के समाज में कई सामाजिक और दार्शनिक प्रश्न थे, जिनका समाधान आदि शंकराचार्य ने अपने ग्रंथों और यात्राओं के माध्यम से किया। उन्होंने युवा पीढ़ी को प्रेरित किया कि वे इन ग्रंथों के माध्यम से अपने जीवन और विचारों में संतुलन ला सकते हैं।

शंकराचार्य ने भारत की ज्ञान परंपरा को स्थापित किया
केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा,
'शंकराचार्य ने बहुत कम आयु में जो कुछ किया, वह असाधारण था। उन्होंने पूरे भारत में पैदल यात्रा की और एक प्रकार से 'चलती-फिरती यूनिवर्सिटी' की भूमिका निभाई। उन्होंने चारों दिशाओं में मठों की स्थापना की और सनातन धर्म का संदेश फैलाया। उनके मठ सिर्फ धार्मिक केंद्र नहीं थे, बल्कि वे ज्ञान के केंद्र भी बने।'
शाह ने बताया कि शंकराचार्य ने वेदों का वितरण और संरक्षण सुनिश्चित किया, ताकि ज्ञान की परंपरा स्थायी रूप से संरक्षित और प्रसारित हो सके। उनके मठ आज भी ज्ञान और अध्यात्म के केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बौद्ध, जैन और अन्य परंपराओं के बीच संतुलन
शाह ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अपने समय में उभरती बौद्ध, जैन, कापालिक और तांत्रिक परंपराओं के बीच सनातन धर्म से जुड़े प्रश्नों का तार्किक और स्पष्ट उत्तर दिया। उन्होंने केवल धार्मिक विचार नहीं दिए, बल्कि भारत को ज्ञान, विचार और मोक्ष के मार्ग भी दिखाए। केंद्रीय मंत्री ने युवाओं के लिए यह संदेश भी दिया कि आदि शंकराचार्य के ग्रंथों में निहित विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा,
'आज की युवा पीढ़ी को चाहिए कि वे शंकराचार्य के जीवन और ग्रंथों से मार्गदर्शन लें। उनके विचार केवल धार्मिक नहीं हैं, बल्कि ये जीवन, समाज और विज्ञान की समझ के लिए भी उपयोगी हैं।'
शाह ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारत को ज्ञान और अध्यात्म का संगम दिया। उन्होंने यात्रा, मठों और ग्रंथों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म की जड़ें मजबूत हों और ज्ञान की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रहे।











