‘गुस्ताख इश्क’ बॉलीवुड की आम रोमांस फिल्मों से अलग अनुभव देती है। यह फिल्म तेज रफ्तार ड्रामा या ग्लैमरस सेटिंग्स की बजाय एहसास, शायरी और पुराने शहरों के माहौल पर आधारित है।
- Movie Review: गुस्ताख इश्क
- कलाकार: विजय वर्मा , फातिमा सना शेख , नसीरुद्दीन शाह और शारिब हाशमी
- लेखक: विभु पुरी और प्रशांत झा
- निर्देशक: विभु पुरी
- निर्माता: मनीष मल्होत्रा
- रिलीज: 28 नवंबर 2025
- रेटिंग: 3.5/5
एंटरटेनमेंट न्यूज़: गुस्ताख इश्क एक ऐसी फिल्म है जो आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में थोड़ा ठहरकर मोहब्बत को महसूस करने का अवसर देती है। इसे डायरेक्ट किया है विभु पुरी ने और प्रोड्यूसर हैं मशहूर फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा। फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यह पुरानी दिल्ली और पंजाब के माहौल, वहां की गलियों, उर्दू शायरी और पुराने जमाने की तहजीब को बेहद सादगी और संवेदनशीलता के साथ पेश करती है।
यह कोई आम बॉलीवुड रोमांस नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली इमोशनल कहानी है, जो जल्दबाजी में नहीं चलती और दर्शक को हर पल के अनुभव में डूबने का मौका देती है।
कहानी: धीरे-धीरे पनपता प्यार
फिल्म की कहानी नवाबुद्दीन सैफुद्दीन रहमान (विजय वर्मा) और मिन्नी (फातिमा सना शेख) के इर्द-गिर्द घूमती है। नवाबुद्दीन अपने पिता की बंद होने वाली प्रिंटिंग प्रेस को बचाने की कोशिश कर रहा है। उसकी उम्मीद है कि अगर मशहूर उर्दू शायर अजीज (नसीरुद्दीन शाह) की शायरी प्रकाशित हो जाए तो प्रेस फिर से चल सकती है।
लेकिन अजीज मानते हैं कि शायरी सिर्फ शोहरत के लिए नहीं होती। नवाबुद्दीन उन्हें मनाने के लिए शायरी सीखने का बहाना बनाकर उनके घर जाना शुरू करता है। वहीं उसकी मुलाकात होती है मिन्नी से, जो एक शांत, सादे और सुलझे हुए स्वभाव की टीचर है। धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ता पनपता है, जिसमें किसी भी तरह का ड्रामा नहीं है, केवल एहसास और भावनाएं हैं।
कहानी का असली सवाल यह है कि क्या नवाबुद्दीन प्रेस बचाने के लिए अजीज की शायरी पब्लिश करेगा, या अपने उस्ताद की भावनाओं का सम्मान करेगा। यही टकराव फिल्म को आगे बढ़ाता है और दर्शकों को एक अलग तरह की मोहब्बत का अहसास कराता है।

एक्टिंग: नैचुरल और दिल को छू लेने वाली
विजय वर्मा इस फिल्म में अपनी पिछली भूमिका से बिल्कुल अलग नजर आते हैं। जहां वे आमतौर पर तीखे या गुस्से वाले किरदार निभाते थे, यहां वे शांत और प्यार में डूबा इंसान हैं। उनकी आंखों में भावनाओं की गहराई और सादगी इसे असली बनाती है। फातिमा सना शेख भी अपने सरल अंदाज में असर छोड़ती हैं। उनकी और विजय की केमिस्ट्री बेहद नैचुरल लगती है।
नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी फिल्म में शायरी और भावनाओं की गहराई जोड़ती है। सहायक कलाकार शारिब हाशमी जैसे कलाकार फिल्म को और भी यथार्थपूर्ण बनाते हैं।
क्या देखें या नहीं
डायरेक्टर विभु पुरी और लेखक प्रशांत झा ने आधुनिक रोमांस से हटकर क्लासिक मोहब्बत की दिशा चुनी है। कैमरा और लोकेशन इस बात का अहसास कराते हैं कि आप सच में 90 के दशक में हैं। मनीष मल्होत्रा का प्रोडक्शन पुराने दौर की सादगी और रोमांस को बड़े ही खूबसूरती से पर्दे पर लाता है। फिल्म का संगीत विशाल भारद्वाज ने दिया है, जबकि गुलजार के बोल इसे और भी भावपूर्ण बनाते हैं। कुल तीन गाने हैं, लेकिन हर गाना प्यार के अलग रंग और एहसास को दर्शाता है। संगीत फिल्म के धीमे और गहरे रोमांस को और जीवंत बनाता है।
यदि आप तेज रफ्तार ड्रामा या ट्विस्ट्स की उम्मीद करते हैं, तो यह फिल्म धीमी लग सकती है। कुछ जगह फिल्म लंबी भी महसूस होती है। लेकिन अगर आप पुरानी गलियों, धीरे-धीरे पनपता प्यार, शायरी और एहसास पसंद करते हैं, तो ‘गुस्ताख इश्क’ आपके दिल को छू जाएगी।












