इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही बताया, प्रशासन को फटकार लगाई और प्रभावित इलाकों में साफ पानी व बेहतर इलाज के निर्देश दिए।
MP News: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के मामले ने अब कानूनी मोर्चे पर गंभीर रूप ले लिया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए प्रशासन और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि पानी पीकर लोगों की मौत होना बेहद गलत है और यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस द्वारकाधीश बंसल और जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि लोग पानी की वजह से मर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि इतने बड़े शहर में लोगों को साफ पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा।
स्वच्छ पेयजल और बेहतर इलाज के निर्देश
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दूषित पानी से बीमार हुए सभी लोगों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा (best medical treatment) देने का आदेश भी दिया गया है। अदालत ने कहा कि लोगों की जान से जुड़ा मामला है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इंदौर की प्रतिष्ठा बनाए रखने की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इंदौर शहर की छवि का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि इंदौर एक बेहद सुंदर शहर है और पूरे देश में इसकी साफ-सफाई की मिसाल दी जाती है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस शहर की सुंदरता और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचेगा।
अब भी साफ पानी से वंचित लोग
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि हालात अब भी सामान्य नहीं हैं। भागीरथपुरा इलाके के कई लोग अभी भी साफ पानी से वंचित हैं। सैकड़ों परिवारों को सिर्फ एक पानी के टैंकर के भरोसे रहना पड़ रहा है। यह सुनकर हाई कोर्ट ने हैरानी जताई और सवाल किया कि सिर्फ एक टैंकर से इतने लोगों की जरूरत कैसे पूरी होगी।
अतिरिक्त टैंकर तुरंत भेजने के आदेश
कोर्ट ने प्रशासन को फौरन अतिरिक्त पानी के टैंकर भेजने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि अगले 10 मिनट के भीतर अतिरिक्त टैंकर इलाके में पहुंचने चाहिए। इतना ही नहीं, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि टैंकरों के पहुंचने के फोटो (photographs) वकीलों के साथ साझा किए जाएं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आदेशों का पालन हो रहा है।
कलेक्टर और एसडीएम को भी बुलाने की चेतावनी

हाई कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर जरूरत पड़े तो कलेक्टर हों या एसडीएम, जिसे भी बुलाना पड़े बुलाइए, लेकिन पानी के टैंकर हर हाल में इलाके में पहुंचने चाहिए। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
नगर निगम का जवाब और स्टेटस रिपोर्ट
इंदौर नगर निगम की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया कि अब तक 30 पानी के टैंकर प्रभावित इलाकों में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 4 और टैंकर तुरंत भेजे जा रहे हैं। नगर निगम ने अदालत में इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट (status report) भी दाखिल की, जिसमें उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।
जनहित याचिकाओं से उठा मामला
दरअसल, इस पूरे मामले में 31 दिसंबर को दो जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गई थीं। पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी की ओर से दाखिल की गई थी। दूसरी याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की तरफ से दायर की गई थी। इन याचिकाओं की पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव ने की।
पहले ही दिए जा चुके हैं अंतरिम निर्देश
हाई कोर्ट ने 31 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम को सभी प्रभावित लोगों का मुफ्त इलाज कराने और उन्हें स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के अंतरिम निर्देश दिए थे। 2 जनवरी को इन आदेशों के पालन को लेकर स्टेटस रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की गई, जिस पर कोर्ट ने संतोष और चिंता दोनों जताई।
तीसरी जनहित याचिका पर भी सुनवाई
इस मामले में एक तीसरी जनहित याचिका पर भी हाई कोर्ट ने सुनवाई की है। इस याचिका पर अदालत ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासन को हर स्तर पर जवाब देना होगा।
अगली सुनवाई की तारीख तय
हाई कोर्ट ने तीसरी जनहित याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी तय की है। वहीं, पहली दो जनहित याचिकाओं पर 6 जनवरी को सुनवाई होनी है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि अगली सुनवाई में राहत और जिम्मेदारी दोनों पर गंभीर चर्चा होगी।
मुआवजा बढ़ाने की मांग
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनीष यादव ने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि नगर निगम की स्टेटस रिपोर्ट में केवल चार मौतों का जिक्र है, जबकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि सही आंकड़े सामने लाना और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना बेहद जरूरी है।










