IndiGo Q3FY26 Results: मुनाफा 78% घटा, फ्लाइट कैंसिलेशन का बड़ा असर

IndiGo Q3FY26 Results: मुनाफा 78% घटा, फ्लाइट कैंसिलेशन का बड़ा असर

IndiGo का Q3FY26 मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये रहा। दिसंबर में पायलटों की कमी और हजारों फ्लाइट रद्द होने से नुकसान हुआ। नए श्रम कानून और डॉलर परिवर्तन ने लागत बढ़ाई, जबकि आय में हल्की बढ़ोतरी रही।

IndiGo Q3FY26 Results: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) के नतीजे गुरुवार को जारी किए। कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे में भारी गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर तिमाही में एयरलाइन का शुद्ध मुनाफा 78 प्रतिशत घटकर 549.1 करोड़ रुपये पर आ गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2,448.8 करोड़ रुपये था।

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह दिसंबर महीने में पायलटों की कमी के कारण हजारों उड़ानों का रद्द होना है। फ्लाइट कैंसिलेशन ने न सिर्फ इंडिगो को सीधे वित्तीय नुकसान में डाल दिया, बल्कि देश के एविएशन सेक्टर में भी हलचल मचाई। इसके अलावा नए श्रम कानून (Labour Laws) के लागू होने से कंपनी की लागत में इजाफा हुआ और परिचालन पर दबाव बढ़ा।

फ्लाइट कैंसिलेशन से हुआ 577 करोड़ का नुकसान

इंडिगो ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि तिमाही में कुल 1,546.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें 577.2 करोड़ रुपये का नुकसान दिसंबर की शुरुआत में हुई फ्लाइट कैंसिलेशन के कारण हुआ। पायलटों की कमी के चलते एयरलाइन को हजारों उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जिससे यात्री असुविधा के साथ-साथ कंपनी की कमाई पर भी असर पड़ा।

इसके अलावा नए श्रम कानून लागू होने के कारण 969.3 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आया। कंपनी को फ्लाइट कैंसिलेशन के लिए 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ा, जिसे अपवाद आइटम्स (Exceptional Items) में दिखाया गया। इसके अलावा डॉलर आधारित फ्यूचर ऑबिगेशन और मुद्रा परिवर्तन से दिसंबर तिमाही में 1,035 करोड़ रुपये का अतिरिक्त असर पड़ा।

परिचालन पर असर

इंडिगो ने दिसंबर तिमाही में परिचालन में व्यवधान की जानकारी दी। पायलटों की कमी और नए नियमों के लागू होने से परिचालन पर दबाव बना। कंपनी ने कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जिससे यात्री अनुभव प्रभावित हुआ। हालांकि, कंपनी ने जल्दी ही पायलटों की भर्ती बढ़ाकर और शेड्यूल में सुधार करके स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन सेक्टर में पायलटों की कमी का असर केवल इंडिगो तक सीमित नहीं है। यह पूरे एविएशन सेक्टर में चुनौती बनी हुई है। उड़ानों में व्यवधान से टिकट बुकिंग, कस्टमर सर्विस और ब्रांड वैल्यू पर असर पड़ता है।

आय में बढ़ोतरी

हालांकि मुनाफा घटा, लेकिन इंडिगो की कुल आय (Revenue) में बढ़ोतरी देखने को मिली। तिमाही के दौरान पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की कुल आय 24,540.6 करोड़ रुपये रही। यह पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 22,992.8 करोड़ रुपये से बढ़कर आया।

इस आंकड़े से साफ है कि एयरलाइन की बिक्री और यात्रियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन परिचालन लागत, फ्लाइट कैंसिलेशन और नए नियमों की वजह से शुद्ध मुनाफा दबाव में रहा।

डॉलर और मुद्रा बदलाव का प्रभाव

इंडिगो ने तिमाही में बताया कि डॉलर आधारित फ्यूचर ऑबिगेशन और विदेशी मुद्रा परिवर्तन से भी 1,035 करोड़ रुपये का अतिरिक्त दबाव पड़ा। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, विमान ईंधन लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का असर कंपनी की लागत पर पड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह दबाव अल्पकालिक है और आने वाले तिमाहियों में कंपनी परिचालन सुधार और लागत नियंत्रण से इसे कम कर सकती है।

नई श्रम कानून (Labour Laws) के लागू होने से एयरलाइन के परिचालन खर्च में इजाफा हुआ। एयरलाइन कर्मचारियों के लिए अधिक लाभ और काम के घंटे निर्धारित किए गए हैं, जिससे परिचालन लागत बढ़ी। इंडिगो ने कहा कि नए कानून के प्रभाव से तिमाही में कुल 969.3 करोड़ रुपये का खर्च आया।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन सेक्टर में नए नियम और परिचालन लागत में इजाफा सामान्य तौर पर लंबे समय में संतुलन बनाते हैं। एयरलाइनें धीरे-धीरे लागत को नियंत्रित करके और परिचालन कुशलता बढ़ाकर अपने मुनाफे को सुधार सकती हैं।

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