कच्चे तेल $100 पार, OMC कंपनियों के शेयरों में गिरावट, UBS ने वित्त वर्ष 2027 के अनुमान घटाए

कच्चे तेल $100 पार, OMC कंपनियों के शेयरों में गिरावट, UBS ने वित्त वर्ष 2027 के अनुमान घटाए

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार गई। इस वजह से भारतीय OMC कंपनियों IOC, BPCL और HPCL पर दबाव बढ़ा। UBS ने इनकी रेटिंग घटाई और मुनाफे के अनुमान में कटौती की है।

OMC Stock: पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है। इस वजह से भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। ब्रोकरेज फर्म UBS ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ कर दी है, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को ‘सेल’ रेटिंग दी गई है।

UBS का कहना है कि हाल की तेजी 2022 के तेल बाजार संकट जैसी स्थिति याद दिलाती है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव OMC कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव करना संभव नहीं है। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से दबाव और बढ़ गया है। मौजूदा समय में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 92 के स्तर पर है, जबकि 2022 में यह लगभग 79 था।

मार्जिन और मुनाफे में कटौती

UBS ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए मार्केटिंग मार्जिन के अनुमान में 43–45% और 22–26% तक कटौती की है। वहीं ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) के अनुमान को बढ़ाकर 30–48% और 21–39% किया गया है। UBS के अनुसार अगर कंपनियों का मुनाफा मार्केटिंग से घटकर रिफाइनिंग की ओर जाता है, तो इसका असर उनकी कुल कमाई पर कम होगा, क्योंकि अधिकांश मुनाफा मार्केटिंग से आता है।

इस आधार पर UBS ने IOC, BPCL और HPCL के वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित शुद्ध लाभ (PAT) में क्रमशः 19%, 15% और 46% तक कटौती की है।

शेयर बाजार में गिरावट

UBS की रिपोर्ट के बाद सोमवार को शेयर बाजार में तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। बीएसई ऑयल एंड गैस इंडेक्स इंट्राडे में लगभग 3% नीचे गया। वहीं HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में 8% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसी दौरान सेंसेक्स भी करीब 2.8% नीचे कारोबार कर रहा था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 40 महीने बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। अप्रैल 2026 के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में यह 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जो सोमवार के कारोबार में 25% से ज्यादा की बढ़त दर्शाता है। पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 68 डॉलर से बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची है, यानी करीब 71% की तेजी हुई।

तेल कीमत का भविष्य और संभावित जोखिम

UBS की ग्लोबल ऑयल टीम ने निकट भविष्य के लिए तेल कीमत के अनुमान भी बढ़ाए हैं। ब्रोकरेज ने 2026 की पहली तिमाही के लिए औसत कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल और पूरे वर्ष के लिए लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल बताई है।

UBS का कहना है कि अगर तेल सप्लाई में बाधा कुछ हफ्तों तक बनी रहती है, तो बाजार में जोखिम प्रीमियम बना रहेगा। संघर्ष लंबा खिंचता है या ऊर्जा ढांचे पर हमले होते हैं, तो ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर से ऊपर और संभवतः 100 डॉलर से भी ऊपर जा सकता है।

पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सीमित असर

भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें मई 2022 से लगभग स्थिर हैं। वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर तत्काल महसूस नहीं होता। UBS का मानना है कि कीमतें बढ़ाने या उत्पाद शुल्क में कटौती करने से भी असर सीमित और अस्थायी होगा।

हाल ही में LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को थोड़ी राहत मिल सकती है। UBS ने अनुमान लगाया है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर-रुपया दर 92 बनी रहती है, तो तेल कंपनियों का संयुक्त मार्जिन करीब 4–5 रुपये प्रति लीटर रह सकता है, जबकि यह वित्त वर्ष 2025 में 13–14 रुपये प्रति लीटर था।

अगर कच्चे तेल की कीमत 5 डॉलर और बढ़ती है, तो डीजल और पेट्रोल के मार्केटिंग मार्जिन में लगभग 2.9 रुपये प्रति लीटर की कमी आ सकती है। इससे IOC के मुनाफे में 153 अरब रुपये, BPCL में 98 अरब रुपये और HPCL में 88 अरब रुपये तक संभावित नुकसान हो सकता है।

OMC कंपनियों के टारगेट प्राइस में कटौती

कमाई में अनिश्चितता को देखते हुए UBS ने इन कंपनियों के टारगेट प्राइस भी घटा दिए हैं। IOC का टारगेट 190 रुपये से घटाकर 175 रुपये किया गया है। BPCL का टारगेट 425 रुपये से घटाकर 365 रुपये और HPCL का टारगेट 540 रुपये से घटाकर 340 रुपये कर दिया गया है।

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