रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी तेल से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह झूठा बताया। कंपनी ने कहा कि जामनगर रिफाइनरी को बीते तीन सप्ताह में कोई रूसी कच्चा तेल नहीं मिला और भविष्य में भी ऐसी कोई खेप नहीं आएगी।
Reports: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने हाल ही में मीडिया में छपी रिपोर्टों को पूरी तरह से गलत बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि रूसी कच्चे तेल से भरे तीन टैंकर गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे हैं। कंपनी ने कहा कि ये खबरें पूरी तरह झूठी हैं और इस तरह की अफवाहें रिलायंस की साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
रिलायंस ने स्पष्ट किया कि बीते तीन सप्ताह में जामनगर रिफाइनरी को किसी भी प्रकार का रूसी कच्चा तेल नहीं मिला है और जनवरी 2026 में भी ऐसी किसी खेप के आने की कोई संभावना नहीं है। कंपनी ने यह भी बताया कि जहाजों की ट्रैकिंग केवल संभावित गंतव्य दिखाती है, लेकिन इससे किसी तेल खरीद या वास्तविक डिलीवरी की पुष्टि नहीं होती।
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट का क्या था दावा
ब्लूमबर्ग ने 2 जनवरी को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में कहा था कि लगभग 22 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल से लदे तीन जहाज जामनगर की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट Kpler नामक शिपिंग डेटा एनालिटिक्स फर्म के आंकड़ों पर आधारित थी, जो जहाजों की आवाजाही और संभावित मंजिलों पर नजर रखती है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद रिलायंस ने रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर कुछ मीडिया और सोशल मीडिया पर अफवाहें तेजी से फैल गईं, जिससे निवेशकों और तेल मार्केट में अस्थिरता देखने को मिली।
अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंध
रूस से तेल आयात पर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कड़ा शिकंजा कस रखा है। इन प्रतिबंधों में शिपिंग, बीमा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सख्त नियम शामिल हैं। अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत से रूस का कच्चा तेल आयात करने पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिससे कुल अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इस समय के परिस्थितियों में भारतीय रिफाइनरियां अपनी कच्चे तेल की खरीद नीति में बदलाव कर रही हैं। रूसी आपूर्ति में कमी की भरपाई के लिए पश्चिम एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से तेल मंगाया जा रहा है, ताकि रिफाइनरी संचालन पर असर न पड़े।
रिलायंस की स्थिति
रिलायंस ने साफ किया है कि जामनगर रिफाइनरी के संचालन पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ा है और कंपनी ने किसी भी विदेशी तेल की खरीद में कोई अनियमितता नहीं की है। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा उत्पादन की निरंतरता और गुणवत्ता बनी रहना है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को केवल ट्रैकिंग डेटा के आधार पर सच मानना गलत होगा। जहाजों की ट्रैकिंग से सिर्फ संभावित गंतव्य का अनुमान लगता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि तेल की डिलीवरी हुई या नहीं।











