सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और EPFO को आदेश दिया कि वे चार महीने के भीतर EPF वेतन सीमा में संशोधन पर निर्णय लें। यह कदम 15,000 रुपये से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के कवरेज को सुनिश्चित करेगा।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO को चार महीने के भीतर वेतन सीमा में संशोधन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह फैसला एक याचिका के बाद आया है, जिसमें तर्क दिया गया था कि वर्तमान वेतन सीमा के कारण कई कर्मचारी EPF कवरेज से बाहर हो गए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वेतन सीमा का स्थिर रहना सामाजिक सुरक्षा पर असर डाल रहा है, इसलिए सरकार को इस मामले में त्वरित कदम उठाने होंगे।
याचिका में क्या था दावा
यह याचिका डॉ. नवीन प्रकाश नौटियाल ने दायर की थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में EPF कवरेज के लिए न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये प्रति माह तय है, जो सितंबर 2014 से अपरिवर्तित है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह सीमा मनमानी और अतार्किक है और इसमें मुद्रास्फीति, न्यूनतम मजदूरी या प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को ध्यान में नहीं रखा गया है। इसके परिणामस्वरूप ऐसे कर्मचारी जो 15,000 रुपये से थोड़ा अधिक कमाते हैं, EPF के दायरे से बाहर हो गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ता को आदेश की कॉपी के साथ विस्तृत प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
15,000 रुपये प्रति माह का न्यूनतम वेतन
केंद्र सरकार ने वर्तमान में EPF कवरेज के लिए न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये प्रति माह तय किया है। यह सीमा पिछले 9 वर्षों से अपरिवर्तित बनी हुई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि मुद्रास्फीति और महंगाई को देखते हुए यह सीमा अब कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि वेतन सीमा में संशोधन नहीं किया गया तो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।

सामाजिक सुरक्षा और EPF कवरेज का महत्व
याचिका में यह भी बताया गया कि 6वीं लोकसभा की लोक लेखा समिति ने अपनी 34वीं रिपोर्ट में कहा था कि यदि निचले स्तर के कर्मचारियों को कल्याणकारी योजनाओं में शामिल नहीं किया जाता, तो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। समिति ने मुद्रास्फीति और समय के साथ वेतन वृद्धि को ध्यान में रखते हुए हर तीन से पांच साल में वेतन सीमा में संशोधन की सिफारिश की थी।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की मंजूरी
इन सिफारिशों को जुलाई 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने मंजूरी दे दी थी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वेतन सीमा में समय-समय पर संशोधन करना आवश्यक है ताकि कर्मचारियों को EPF कवरेज का पूरा लाभ मिल सके। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और EPFO को निर्देश दिया कि वे चार महीने के भीतर वेतन सीमा में संशोधन पर निर्णय लें। अदालत ने यह भी कहा कि यह निर्णय सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए समयसीमा तय की है ताकि कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहें और EPF कवरेज सभी पात्र कर्मचारियों तक पहुंचे।
कर्मचारियों के लिए संभावित असर
यदि केंद्र सरकार वेतन सीमा में संशोधन करती है, तो 15,000 रुपये से थोड़ा अधिक कमाने वाले कर्मचारी भी EPF के दायरे में आएंगे। इसका मतलब यह होगा कि उन्हें पेंशन, चेक और अन्य भविष्य निधि लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सफलता सुनिश्चित करेगा।












