पश्चिम एशिया संकट! राज्यसभा में खरगे के बयान पर हंगामा, कुछ भारतीय मारे गए होने का किया दावा

पश्चिम एशिया संकट! राज्यसभा में खरगे के बयान पर हंगामा, कुछ भारतीय मारे गए होने का किया दावा

राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया संकट पर कहा कि कुछ भारतीय मारे गए या लापता हैं। उनके बयान पर सदन में हंगामा हुआ। विदेश मंत्री जयशंकर ने नागरिक सुरक्षा और कूटनीति पर सरकार का रुख स्पष्ट किया।

नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया और पहले ही दिन हंगामेदार माहौल देखने को मिला। पश्चिम एशिया संकट को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस हुई। राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बड़ा दावा किया कि इस क्षेत्र में कुछ भारतीय मारे गए हैं और कुछ लापता हैं। उनके इस बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा मच गया।

मल्लिकार्जुन खरगे का दावा

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 55 फीसदी हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है और इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय काम कर रहे हैं।

खरगे ने जोर देकर कहा कि हाल ही में कुछ घटनाओं में भारतीय नागरिक मारे गए या लापता हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में संसद में नियम 176 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति मिलनी चाहिए। उनका तर्क था कि भारत के लिए यह क्षेत्र सिर्फ ऊर्जा ही नहीं बल्कि लाखों नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

राज्यसभा में हंगामा

खरगे के बयान के बाद राज्यसभा में विपक्ष और सरकार के बीच तनाव बढ़ गया। सांसदों ने जोर-जोर से आपत्ति जताई और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। विपक्ष के कई नेता लगातार बात करते रहे, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।

इस दौरान राज्यसभा में उपस्थित विदेश मंत्री एस. जयशंकर पश्चिम एशिया में भारत के स्टैंड और सुरक्षा प्रयासों पर अपना बयान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संकट की शुरुआत 28 फरवरी से हुई और भारत लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।

जयशंकर ने क्या कहा

विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि पश्चिम एशिया के हालात पर मंत्रालय लगातार निगरानी रख रहा है। गल्फ क्षेत्र में आम जनजीवन और व्यापार प्रभावित हुआ है। मंत्रालय ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों के संपर्क में रहकर उन्हें आवश्यक मदद दी है।

जयशंकर ने कहा कि संकट की समीक्षा के लिए केंद्रीय कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक भी हुई है और सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्र में संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने की कोशिश जारी है।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति इस मामले में संतुलित और प्रभावी रही है। उन्होंने कहा कि सभी प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं कि भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें और आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।

ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिक

राज्यसभा में हुई बहस में यह भी सामने आया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पश्चिम एशिया संकट का असर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया से भारत को तेल और गैस का बड़ा हिस्सा मिलता है। इस क्षेत्र में अस्थिरता की वजह से घरेलू गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, जो आम नागरिकों और उद्योगों दोनों के लिए चिंता का विषय है।

विदेश मंत्री ने बताया कि मंत्रालय लगातार भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर उन्हें निकालने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले जा चुके हैं और भारत लगातार इस प्रक्रिया में सक्रिय है।

सरकार का रुख

विपक्ष ने राज्यसभा में जोर देकर कहा कि सरकार को और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। मल्लिकार्जुन खरगे ने यह भी कहा कि इस संकट के चलते भारत की ऊर्जा और व्यापारिक कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

सरकार की ओर से विदेश मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा उपाय लगातार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

हंगामे के बीच चर्चा जारी

राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के लगातार आपत्ति जताने के बावजूद जयशंकर ने अपनी बात रखी और यह स्पष्ट किया कि संकट की निगरानी और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय सभी संभावित कदम उठा रहा है और भारतीय नागरिकों के सुरक्षित निकासी के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

सांसदों और विपक्ष के नेताओं ने भी सरकार से सवाल किए कि क्षेत्र में फंसे नागरिकों की स्थिति और सुरक्षा उपायों को लेकर क्या योजना है। सरकार ने बताया कि भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय लगातार लोगों से संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद उपलब्ध कराई जा रही है।

मिडिल ईस्ट की वर्तमान स्थिति

मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। इस संघर्ष से गल्फ क्षेत्र में नागरिक जीवन, व्यापार और हवाई कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। भारत ने अपनी नीति में संतुलन बनाए रखा है और क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि मिडिल ईस्ट में स्थिति लगातार निगरानी में है और भारत की ओर से हर संभावित कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।

Leave a comment