कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद, शिवकुमार समर्थकों ने की गुप्त बैठक

कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद, शिवकुमार समर्थकों ने की गुप्त बैठक

कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद बढ़ गया है। डी.के. शिवकुमार समर्थकों ने बेंगलुरु में गुप्त विधायक बैठक की और पार्टी आलाकमान से नेतृत्व में स्पष्टता और शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

Karnataka: कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद अब चरम पर पहुंचता दिख रहा है। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थकों ने बेंगलुरु के एक निजी होटल में गुप्त बैठक की, जिसमें लगभग 40 समान विचारधारा वाले विधायक शामिल हुए। इस बैठक में विधायक शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद पर बैठाने की मांग लेकर पार्टी आलाकमान से कार्रवाई करने का आग्रह करने का निर्णय लिया गया। राजनीतिक गलियारों में इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

होटल में हुई बैठक

मगाडी के विधायक एच.सी. बालकृष्ण के नेतृत्व में यह बैठक आयोजित की गई। आधिकारिक तौर पर इसे बालकृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मिलन समारोह बताया गया, लेकिन सूत्रों के अनुसार अंदरूनी चर्चा पूरी तरह नेतृत्व परिवर्तन पर केंद्रित थी। बालकृष्ण ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में शामिल विधायकों ने पार्टी आलाकमान से अनुरोध किया कि कर्नाटक में नेतृत्व विवाद को शीघ्र सुलझाया जाए।

बालकृष्ण ने कहा कि पार्टी के विभिन्न क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लगातार यह सवालों का सामना करना पड़ रहा है कि कांग्रेस में नेतृत्व बदलाव कब होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब विधायक मिलते हैं तो स्वाभाविक रूप से इस विषय पर चर्चा होती है और यह चर्चा पार्टी के लिए आवश्यक है।

विधायक चाहते हैं स्पष्टता

बैठक में मौजूद अधिकांश विधायकों का मानना है कि जब तक नेतृत्व विवाद का स्पष्ट समाधान नहीं होगा, तब तक उनकी राजनीतिक स्थिति असुरक्षित रहेगी। बालकृष्ण ने संकेत दिया कि इससे 2028 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान को चाहिए कि या तो अध्यक्ष बदलें या मुख्यमंत्री, यह मुख्य बात नहीं है, लेकिन निर्णय अवश्य लिया जाए।

मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद

राज्य में सत्ता संघर्ष नवंबर 2025 से तेज हुआ है। उस समय से ऐसी खबरें आईं कि सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण का समझौता हुआ था, जिसके तहत सिद्धरमैया पहले ढाई वर्ष मुख्यमंत्री बने और उसके बाद शिवकुमार कार्यभार संभालेंगे। हालांकि, इसका आधिकारिक रूप से कभी पुष्टि नहीं हुई। शिवकुमार समय-समय पर संकेत देते रहे हैं कि यह समझौता हुआ था, जबकि सिद्धरमैया का कहना है कि वह पूरे पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे।

कांग्रेस आलाकमान की भूमिका

बालकृष्ण ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जाने का नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान को कर्नाटक में हो रही घटनाओं की जानकारी है और उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को जल्दी सुलझाए। विधायक चाहते हैं कि भ्रम समाप्त हो और पार्टी के भीतर स्पष्टता हो ताकि आगे राजनीतिक रणनीति पर ध्यान दिया जा सके।

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