लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर सियासत तेज, संसद सत्र से पहले किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर बड़ा हमला

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर सियासत तेज, संसद सत्र से पहले किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर बड़ा हमला

लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव को लेकर सियासत तेज हो गई है। किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि इस फैसले पर पार्टी को पछताना पड़ेगा। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर बहस होने की संभावना है।

New Delhi: संसद के आगामी सत्र से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव को लेकर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि पार्टी को इस कदम पर आखिरकार पछतावा होगा। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस ने जिस तरह स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है, वह संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार निशाना बनाने जैसा है।

दरअसल, कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। इस नोटिस के बाद संसद में इस मुद्दे पर बहस होने की संभावना है। माना जा रहा है कि सोमवार से शुरू होने वाली यह चर्चा दो दिनों तक चल सकती है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

कांग्रेस के कदम पर रिजिजू की सख्त टिप्पणी

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के फैसले को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पास स्पीकर को हटाने की मांग करने के लिए कोई मजबूत कारण नहीं है।

रिजिजू के मुताबिक यह नोटिस केवल राजनीतिक कारणों से लाया गया है और इसका उद्देश्य स्पीकर पद को विवादों में घसीटना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस बहस की मांग की है, इसलिए सरकार इस मुद्दे को संसद में पूरी मजबूती से उठाएगी।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को यह प्रस्ताव लाने का पछतावा होगा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष स्पीकर जैसे संवैधानिक पद को भी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बना रहा है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए सही संकेत नहीं है।

संसद में बहस की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, संसद के आगामी सत्र में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। संभावना है कि सोमवार से लोकसभा में इस विषय पर बहस शुरू हो और यह दो दिनों तक जारी रहे।

सत्ताधारी पक्ष यानी भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए इस बहस के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगियों के फैसले की आलोचना कर सकता है। एनडीए के नेताओं का कहना है कि स्पीकर के खिलाफ ऐसा कदम उठाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है और इससे संस्थागत व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।

लोकसभा में संख्या बल का समीकरण

लोकसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए विपक्ष का प्रस्ताव पास होना लगभग असंभव माना जा रहा है। सदन में कुल 541 सदस्य हैं, जिनमें एनडीए के पास करीब 293 सांसदों का समर्थन है।

इस स्थिति में विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव हार सकता है। हालांकि इसके बावजूद सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन दिखाने की कोशिश करेगा। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि स्पीकर को सदन के अधिकांश सदस्यों का भरोसा प्राप्त है।

छोटी पार्टियों का समर्थन मिलने का दावा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने यह भी दावा किया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को कई छोटी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिल रहा है। उनके मुताबिक यह समर्थन दिखाता है कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों में दम नहीं है।

उन्होंने कहा कि संसद के नियम स्पीकर को इस तरह की स्थिति में बहस में शामिल होने और अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने का अधिकार देते हैं। हालांकि बहस की अध्यक्षता स्पीकर नहीं करते, लेकिन वे अपने बचाव में अपनी बात रख सकते हैं।

संसद सत्र से पहले अन्य मुद्दों पर भी नजर

स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव के अलावा संसद सत्र में कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इनमें विदेश नीति से जुड़े विषय भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर लोकसभा में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर बयान दे सकते हैं। यह मुद्दा हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में रहा है और विपक्ष इस विषय पर सरकार से सवाल पूछ रहा है। ऐसे में संसद का यह सत्र राजनीतिक बहस और महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों दोनों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

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