प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को संगम स्नान से रोके जाने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद राजनीति तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर कुशासन और प्रशासनिक नाकामी का आरोप लगाया।
UP Politics: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर एक बड़ा विवाद सामने आया है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम स्नान से रोके जाने और उनके समर्थकों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। घटना के बाद शंकराचार्य ने स्नान करने से इनकार कर दिया और बीच रास्ते से ही अपनी पालकी के साथ अखाड़े लौट गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे सरकार का कुशासन और प्रशासनिक नाकामी करार देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों और समर्थकों के साथ संगम स्नान के लिए निकले थे। इसी दौरान प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में उनकी पुलिसकर्मियों से तीखी बहस हो गई। मौके पर मौजूद अधिकारियों और समर्थकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई।
इस अफरा-तफरी के बाद शंकराचार्य ने स्नान न करने का निर्णय लिया और बिना संगम पहुंचे ही वापस लौट गए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद साधु-संतों और श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली।
अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद निंदनीय और अक्षम्य है।
अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब माघ मेले या शाही स्नान के दौरान परंपराओं में बाधा डाली गई हो। उन्होंने कहा कि सदियों से चली आ रही सनातनी परंपराओं का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बीजेपी सरकार इसमें पूरी तरह विफल रही है।
“ऐसी घटनाएं सिर्फ बीजेपी राज में क्यों”

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि मौनी अमावस्या का शाही स्नान कोई नई परंपरा नहीं है। यह हर साल होता रहा है और पहले कभी ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं सिर्फ बीजेपी की सरकार में ही क्यों हो रही हैं।
अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस हालात के लिए बीजेपी का कुशासन और नाकाम व्यवस्था दोषी है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह हालात को संभालने में पूरी तरह विफल रहा।
मुख्यमंत्री योगी पर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण विवाद से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अहंकारी बीजेपी शासन और प्रशासन अपने से बड़े किसी को नहीं मानता।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब क्या इस घटना का दोष भी कृत्रिम मेधा यानी AI पर मढ़ दिया जाएगा। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में आरोप लगाया था कि विपक्ष मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण को लेकर AI से बनी तस्वीरों के जरिए भ्रम फैला रहा है।
जांच की मांग और सरकार पर गंभीर आरोप
सपा प्रमुख ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार न सिर्फ लापरवाह है बल्कि संवेदनहीन भी हो चुकी है। साधु-संतों के सम्मान और धार्मिक परंपराओं की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाती हैं।
पुलिस प्रशासन का पक्ष
वहीं, पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। माघ मेला के पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना पूर्व अनुमति के करीब 200 से 250 समर्थकों के साथ पुल नंबर दो का बैरिकेड तोड़कर स्नान घाट की ओर बढ़ रहे थे।
उनके अनुसार, शंकराचार्य को बताया गया था कि संगम क्षेत्र में भारी भीड़ है और सुरक्षा कारणों से प्रवेश संभव नहीं है। इसके बावजूद वे आगे बढ़ने पर अड़े रहे। पुलिस के रोकने पर वे बिना स्नान किए वापस लौट गए।
शंकराचार्य के समर्थकों का आरोप
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने प्रशासन के बयान को खारिज करते हुए कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना पूरी तरह से सुनियोजित थी और प्रशासन ने जानबूझकर शंकराचार्य को संगम स्नान से रोका।
योगीराज ने दावा किया कि शंकराचार्य के समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से संगम नोज की ओर जा रहे थे, लेकिन षड्यंत्र के तहत प्रशासनिक लोगों ने धक्का-मुक्की की और संतों को बेरहमी से पीटा।











