डीग के किसान के डेढ़ साल के बेटे के साथ हुई घटना ने चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। इलाज के भरोसे गए परिवार को गहरा सदमा मिला। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
Rajasthan: डीग जिले की पहाड़ी तहसील के कैथवाड़ा गांव में रहने वाले किसान भीम सिंह के डेढ़ साल के बेटे मयंक के पेट में कुछ समय पहले गांठ दिखाई दी थी। बच्चे की हालत को लेकर चिंतित परिवार ने स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद 31 मई 2024 को भीम सिंह अपने बेटे को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित कांता देवी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर लेकर गए।
अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बच्चे के पेट में गांठ है और इसे ऑपरेशन के जरिए निकालना जरूरी है। किसान परिवार डॉक्टरों की बातों पर भरोसा कर सर्जरी के लिए तैयार हो गया। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि गांठ सफलतापूर्वक निकाल दी गई है और बच्चा ठीक हो जाएगा।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद ही मयंक की तबीयत दोबारा बिगड़ने लगी। बच्चे को तेज बुखार, कमजोरी और संक्रमण की समस्या होने लगी। परेशान होकर भीम सिंह उसे राजस्थान के जयपुर के अस्पतालों में दिखाने ले गए। वहां की गई जांच में जो रिपोर्ट सामने आई, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
जांच में पता चला कि बच्चे की बाईं किडनी शरीर में मौजूद ही नहीं है। इसके साथ ही गंभीर संक्रमण भी फैल चुका था। डॉक्टरों ने बताया कि बिना किडनी के बच्चे की हालत भविष्य में और गंभीर हो सकती है।
भीम सिंह का आरोप है कि मथुरा के अस्पताल में डॉक्टरों ने गांठ निकालने के बहाने उनके बेटे की किडनी निकाल ली। जब उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किए तो उन्हें डराया और धमकाया गया।
पुलिस शिकायत के बाद दर्ज हुई एफआईआर
पीड़ित किसान ने मथुरा के छाता थाने में इस पूरे मामले की शिकायत दी। शुरुआत में पुलिस ने मामला दर्ज करने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद भीम सिंह ने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आदेश और धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई।
इस मामले में अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. पुष्पेंद्र समेत कई डॉक्टरों के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। इनमें डॉ. श्यामबिहारी शर्मा, डॉ. समर्थ, डॉ. आशीष, डॉ. निश्चेतना, डॉ. दीपक अग्रवाल और डॉ. शालिनी शामिल हैं। इसके अलावा 5–6 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने भारतीय नवीन दंड संहिता (BNS) की धारा 143 और मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 की धारा 18 और 19 के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं बिना सहमति अंग निकालने और अवैध अंग व्यापार से जुड़ी हैं।
पहले भी विवादों में रहा अस्पताल
कांता देवी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहले भी विवादों में रह चुका है। कोरोना काल के दौरान यहां मृत मरीजों के शवों को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। अब मासूम बच्चे की किडनी निकाले जाने का यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस घटना से न सिर्फ राजस्थान बल्कि ब्रज क्षेत्र में भी आक्रोश फैल गया है। लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।












