Meta की AI आधारित प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर विरोध तेज हो गया है। यूजर के मैसेज, सर्च और इंटरेक्शन के आधार पर विज्ञापन दिखाने पर कई संगठनों ने FTC में शिकायत दर्ज करवाई है।
Meta ने हाल ही में अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है, जिसका असर फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और थ्रेड्स जैसे प्लेटफॉर्म के करोड़ों यूजर्स पर पड़ेगा। इस नई पॉलिसी के तहत कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यूजर्स के व्यवहार, मैसेज, सवाल और प्लेटफॉर्म पर की गई गतिविधियों का विश्लेषण करेगी। इसके बाद उन्हीं जानकारियों के आधार पर यूजर को विज्ञापन दिखाए जाएंगे।
आलोचकों का कहना है कि यह बदलाव यूजर की निजता के लिए खतरा बन सकता है, क्योंकि अब बातचीत और इंटरेक्शन का मेटाडेटा भी विज्ञापन टारगेटिंग में इस्तेमाल किया जाएगा। इसी कारण कई लोग इसे यूजर्स के लिए “सिरदर्द” बता रहे हैं।
AI के जरिए कैसे होगा यूजर डेटा का इस्तेमाल
Meta की नई नीति के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर किए गए सवाल, चैट, वॉयस मैसेज और मीडिया शेयरिंग जैसी गतिविधियों से डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह डेटा यूजर प्रोफाइल से जुड़े मेटाडेटा के साथ जोड़कर AI सिस्टम को दिया जाएगा, ताकि यूजर की रुचियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
कंपनी ने अपने Meta AI को पहले ही सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स में शामिल कर लिया है। Meta का कहना है कि “AI at Meta” के जरिए यूजर को वही विज्ञापन दिखाए जाएंगे, जो उनकी पसंद से जुड़े हों। हालांकि, प्राइवेसी विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रक्रिया में यूजर की निजी जानकारी अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग हो सकती है।
पर्सनलाइज्ड ऐड का उदाहरण देकर समझाया

Meta ने उदाहरण देकर बताया है कि अगर कोई यूजर Meta AI से हाइकिंग या ट्रैवल से जुड़ा सवाल पूछता है, तो उसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हाइकिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स के विज्ञापन दिखाए जाएंगे। जैसे ट्रैकिंग शूज, बैग या अन्य जरूरी सामान।
कंपनी का दावा है कि इससे यूजर को ऐसे विज्ञापन नहीं दिखेंगे, जिनमें उसकी कोई रुचि नहीं है। साथ ही, यूजर को ई-मेल और इन-ऐप नोटिफिकेशन के जरिए भी विज्ञापनों की जानकारी दी जा सकती है। Meta का कहना है कि इसका मकसद यूजर अनुभव बेहतर बनाना और सही समय पर सही प्रोडक्ट की जानकारी देना है।
FTC में शिकायत
Meta की इस नई प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ अमेरिका में विरोध शुरू हो गया है। अब तक 36 कंज्यूमर प्रोटेक्शन, प्राइवेसी और सिविल राइट्स ग्रुप्स ने फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) में शिकायत दर्ज करवाई है। इन संगठनों का कहना है कि AI के जरिए यूजर को टारगेट करना प्राइवेसी के मूल अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
इन ग्रुप्स ने मांग की है कि FTC इस पॉलिसी की गहन जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि यूजर की व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग न हो। हालांकि Meta का कहना है कि यह बदलाव उसके रेवेन्यू मॉडल को मजबूत करने के साथ-साथ यूजर को बेहतर और उपयोगी विज्ञापन दिखाने के लिए किया गया है।
फिलहाल, Meta की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर बहस जारी है और आने वाले समय में इस पर नियामक एजेंसियों का रुख अहम माना जा रहा है।










