राम रहीम को जेल से 40 दिन की मिली पैरोल, प्रशासन ने डेरा में रहने का दिया आदेश

राम रहीम को जेल से 40 दिन की मिली पैरोल, प्रशासन ने डेरा में रहने का दिया आदेश

डेरे सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मिली है। वह रोहतक जेल से बाहर निकलकर पैरोल अवधि के दौरान सिरसा स्थित डेरा में रहेंगे। यह उनके 15वें बार जेल से बाहर आने का अवसर है।

Haryana: डेरे सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मंजूर कर दी गई है। यह राम रहीम के लिए कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इससे पहले अगस्त और सितंबर में भी उन्हें लंबी पैरोल मिल चुकी है। इस बार भी राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आएंगे और पैरोल अवधि के दौरान उनका ठिकाना सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा ही रहेगा।

राम रहीम की पिछली पैरोल

गुरमीत राम रहीम को इससे पहले कई बार फरलो और पैरोल मिल चुकी है। पिछली बार 15 सितंबर को उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली थी। अब 40 दिन की पैरोल मिलने के बाद वह 15वीं बार जेल से बाहर आएंगे। इससे पहले भी जब उन्हें 21 दिन या 40 दिन की पैरोल मिली थी, तब भी वह सिरसा स्थित डेरे में ही रहे। प्रशासन ने इस बार भी स्पष्ट किया है कि पैरोल अवधि के दौरान राम रहीम सिरसा डेरा से बाहर नहीं जाएंगे।

कौन से मामलों में काट रहे हैं सजा

गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामलों में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने अगस्त 2017 में दोषी ठहराया था। कोर्ट ने उन्हें 10-10 साल की सजा सुनाई, यानी कुल 20 साल की जेल की सजा। इसके अलावा, उन्हें डेरे मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामलों में भी दोषी करार दिया गया। सभी मामलों में वह रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे हैं।

पैरोल मिलने की वजह और प्रक्रिया

हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में हलफनामे में बताया कि राम रहीम जेल में अच्छा चाल-चलन रखने वाला कैदी है। जेल नियमों के अनुसार, एक कैदी को साल में कुल 90 दिन तक की पैरोल मिल सकती है। इसी नियम के तहत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल दी गई है। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि पैरोल के दौरान उनका ठिकाना डेरा रहेगा और वह किसी अन्य जगह नहीं जा सकते।

पिछले मामलों का संक्षिप्त विवरण

राम रहीम पर लगाए गए आरोपों में वर्ष 1999 का मामला भी शामिल है। सीबीआई ने पीड़ित साध्वियों के बयान वर्ष 2005 में दर्ज किए थे। साल 2017 में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई। साथ ही कुल 30 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इस मामले ने देश में लंबे समय तक सुर्खियां बनाईं और इसके बाद भी राम रहीम की पैरोल और फरलो को लेकर चर्चा होती रही।

पैरोल पर उठ रहे सवाल

राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने भी इसकी आलोचना करते हुए कहा कि राम रहीम कोई सामान्य कैदी नहीं बल्कि एक हार्ड क्रिमिनल है। उनके अनुसार ऐसे अपराधी को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति देना चिंता का विषय है।

सरकार का पक्ष और नियमों का हवाला

हरियाणा सरकार ने इस मामले में हाई कोर्ट में स्पष्ट किया कि राम रहीम हार्ड क्रिमिनल नहीं हैं। सरकार का कहना है कि राम रहीम जेल में अच्छा व्यवहार कर रहे हैं और उनके व्यवहार को देखते हुए नियमों के अनुसार उन्हें पैरोल दी गई है। जेल नियमों के अनुसार, एक कैदी साल में कुल 90 दिन तक पैरोल ले सकता है और इसी का पालन किया गया है।

पैरोल के दौरान डेरा में रहेंगे राम रहीम

जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि पैरोल अवधि के दौरान राम रहीम सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में ही रहेंगे। वह किसी अन्य जगह नहीं जा सकते और प्रशासन उनकी निगरानी भी करेगा। पैरोल का यह नियम अपराधियों की सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए लागू किया जाता है।

राम रहीम की पैरोल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

गुरमीत राम रहीम की बार-बार मिलने वाली पैरोल देश में चर्चा का विषय रही है। 2017 से अब तक राम रहीम को कई बार फरलो और पैरोल मिली है। इस बार मिली 40 दिन की पैरोल उनके 15वें बार जेल से बाहर आने का मौका है। इससे पहले उन्हें 21 दिन और 40 दिन की पैरोल मिल चुकी है। इस सिलसिले ने लोगों में सवाल भी खड़े किए हैं कि क्या पैरोल का नियम सभी कैदियों के लिए समान रूप से लागू होता है।

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