महंगाई में राहत, ग्रोथ में मजबूती, RBI के नए अनुमानों पर बाजार की नज़र

महंगाई में राहत, ग्रोथ में मजबूती, RBI के नए अनुमानों पर बाजार की नज़र

RBI की MPC बैठक से पहले संकेत हैं कि FY26 GDP अनुमान बढ़ाया जा सकता है, जबकि CPI में तेज गिरावट के कारण महंगाई अनुमान और घट सकता है। मजबूत मांग, बेहतर आर्थिक डेटा और स्थिर कमोडिटी कीमतें केंद्रीय बैंक के रुख को समर्थन दे रही हैं।

RBI Update: रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक से पहले आर्थिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार को होने वाली बैठक को लेकर अर्थशास्त्रियों और निवेशकों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI आने वाले समय के लिए अपने मैक्रोइकोनॉमिक अनुमानों में बड़ा बदलाव कर सकता है।

पिछले कुछ महीनों में आए कई आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत संकेतों ने इस बार के अपडेट को और महत्वपूर्ण बना दिया है। एक ओर ग्रोथ के मोर्चे पर उत्साह बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर महंगाई में तेजी से आई नरमी ने केंद्रीय बैंक को सकारात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।

ग्रोथ पर संभावनाएं

हाल के आर्थिक डेटा बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूती दिखा रही है। सितंबर तिमाही में GDP ग्रोथ अनुमान से ज्यादा बेहतर आई, जिसने अर्थव्यवस्था के प्रति भरोसा और बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि RBI FY26 के लिए ग्रोथ अनुमान को 6.8% से बढ़ाकर 7% के आसपास ले जा सकता है।

GST कटौती के बाद बाजार में मांग तेजी से बढ़ी है, जिसका असर Q3 में भी जारी रहने की उम्मीद है। क्रेडिट ग्रोथ में मजबूती, टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी और नॉन-ऑयल-नॉन-गोल्ड इम्पोर्ट्स में उछाल जैसे संकेत बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत आधार पर खड़ी हैं। ये सभी कारक RBI को ग्रोथ अनुमान में सुधार करने की चुनौती और अवसर दोनों देते हैं।

महंगाई की स्थिति

RBI की नजर इस समय ग्रोथ के साथ महंगाई पर भी है। अक्टूबर में CPI महंगाई 0.25% दर्ज हुई, जो मौजूदा श्रृंखला में सबसे कम स्तर है। यह गिरावट दो प्रमुख कारणों से आई है। पहला, सब्जियों की कीमतों में लगातार नौ महीने की गिरावट और दूसरा, GST में कटौती के कारण कई रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम घटे हैं।

विश्लेषकों का अनुमान है कि नवंबर और दिसंबर में भी CPI 1% से नीचे रह सकती है। इसी वजह से उम्मीद की जा रही है कि RBI अपने महंगाई अनुमान को 2.6% से घटाकर लगभग 1.8–2% कर सकता है। महंगाई में यह गिरावट उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है और व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करती है।

RBI नीति रुख

केंद्रीय बैंक पिछले कुछ महीनों में लगातार महंगाई अनुमान को कम करता आया है। फरवरी में FY26 की महंगाई 4.2% बताई गई थी, जिसे अक्टूबर में घटाकर 2.6% कर दिया गया। अब एक बार फिर अनुमान में कमी की तैयारी दिख रही है। RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने हाल ही में कहा था कि भारत में महंगाई अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि CPI में खाद्य पदार्थों का वजन अधिक है और उनकी कीमतों में अस्थिरता बनी रहती है।

इस अस्थिरता के बावजूद हाल के महीनों में दिखी नरमी RBI के लिए राहत की स्थिति बनाती है। नीति निर्माताओं का फोकस फिलहाल मूल्य स्थिरता और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाए रखने पर है।

क्यों घट रही है महंगाई

महंगाई में आई गिरावट कई फैक्टर्स का परिणाम है। सब्जियों की कीमतों में लगातार आई नरमी ने CPI को नीचे खींचा है। इसके साथ ही कई कैटेगरी में GST कटौती से उपभोक्ता वस्तुओं के दाम में गिरावट आई है, जिसका सीधा असर महंगाई पर दिखा। कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि मौसमी कारक भी कीमतों में गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन समग्र रूप से सरकार और RBI की नीतियों ने कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण बनाया है।

इसके साथ ही वैश्विक कमोडिटी कीमतों में स्थिरता ने भी राहत दी है। आने वाले महीनों में इन रुझानों का असर जारी रहता है तो RBI को पॉलिसी रुख में अधिक लचीलापन मिल सकता है।

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