मोदी ने समुद्र प्रताप की तारीफ में किया पोस्ट, जानें जहाज की अनोखी खूबियां

मोदी ने समुद्र प्रताप की तारीफ में किया पोस्ट, जानें जहाज की अनोखी खूबियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ICGS समुद्र प्रताप की कमीशनिंग को आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि बताया। यह जहाज समुद्री सुरक्षा, आपात स्थितियों में राहत और प्रदूषण नियंत्रण में स्वदेशी तकनीक का प्रतीक है।

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय तट रक्षक जहाज ICGS समुद्र प्रताप की कमीशनिंग को भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि यह जहाज समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। उन्होंने इसे भारतीय तट रक्षक की ताकत बढ़ाने वाला और स्वदेशी तकनीक का जीवंत उदाहरण बताया।

ICGS समुद्र प्रताप का निर्माण और कमीशनिंग

ICGS समुद्र प्रताप को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा निर्मित किया गया है। यह दो स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाजों में पहला है। निर्माण कार्य 23 फरवरी 2022 को शुरू हुआ था और 5 जनवरी को इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधिकारिक रूप से कमीशन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 'X' प्लेटफॉर्म पर लिखा कि यह जहाज हमारी आत्मनिर्भरता की दृष्टि को मजबूती देता है, सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देता है और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

जहाज की मुख्य विशेषताएं

ICGS समुद्र प्रताप भारतीय तट रक्षक का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक जहाज है। इसकी लंबाई 114.5 मीटर, वजन 4,200 टन और गति 22 नॉटिकल मील प्रति घंटा है। एक बार में यह जहाज 6,000 नॉटिकल मील का सफर तय कर सकता है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की मेक इन इंडिया पहल और समुद्री आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

प्रदूषण नियंत्रण में ICGS समुद्र प्रताप की क्षमता

यह जहाज समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगे हैं, जिनमें साइड-स्वीपिंग आर्म्स, हाई-कैपेसिटी ऑयल रिकवरी सिस्टम, फ्लोटिंग बूम्स और एडवांस्ड स्किमर्स शामिल हैं। इसके अलावा, जहाज में एक समर्पित प्रदूषण नियंत्रण लैब और पोर्टेबल बार्जेस भी हैं, जो तेल रिसाव को रोकने, इकट्ठा करने और सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

फायर फाइटिंग सिस्टम से समुद्री आपात स्थितियों में मदद

ICGS समुद्र प्रताप में अत्याधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi Class 2) भी लगाया गया है। यह सिस्टम न केवल जहाज पर लगी आग को नियंत्रित कर सकता है, बल्कि अन्य जहाजों और ऑफशोर इंस्टॉलेशन्स पर लगी बड़ी आग से निपटने में भी सक्षम है। इससे समुद्री आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ती है और नुकसान को कम किया जा सकता है।

आधुनिक ऑटोमेशन और नेविगेशन सिस्टम

ICGS समुद्र प्रताप में कई अत्याधुनिक ऑटोमेशन और नेविगेशन सिस्टम लगे हैं। इनमें डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। ये सभी सिस्टम कठिन समुद्री मिशनों में सटीकता, दक्षता और बैकअप सुनिश्चित करते हैं।

सुरक्षा और हथियार क्षमता

समुद्री सुरक्षा कार्यों के लिए जहाज में 30 एमएम CRN-91 गन और दो 12.7 एमएम स्टेबलाइज्ड रिमोट-कंट्रोल्ड गन्स हैं। ये हथियार एडवांस्ड फायर-कंट्रोल सिस्टम से जुड़े हैं और जहाज की सुरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं। साथ ही, जहाज में सुरक्षा और बचाव के लिए आधुनिक तकनीक मौजूद है, जो समुद्री कानून प्रवर्तन और खोज एवं बचाव अभियानों में मदद करती है।

क्रू और तैनाती

ICGS समुद्र प्रताप को 14 अधिकारियों और 115 कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाएगा। यह जहाज कोच्चि में तैनात होगा। एक तट रक्षक जहाज का कमीशनिंग उसके सक्रिय ऑपरेशनल जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। इसके जुड़ने से भारतीय तट रक्षक की ऑपरेशनल ताकत बढ़ेगी और समुद्री सुरक्षा, आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया और पर्यावरण संरक्षण की क्षमता मजबूत होगी।

ICGS समुद्र प्रताप की खासियतें

  • लंबाई: 114.5 मीटर
  • वजन: 4,200 टन
  • गति: 22 नॉटिकल मील प्रति घंटा
  • रेंज: 6,000 नॉटिकल मील
  • स्वदेशी सामग्री: 60 प्रतिशत से अधिक
  • प्रदूषण नियंत्रण उपकरण: साइड-स्वीपिंग आर्म्स, ऑयल रिकवरी सिस्टम, फ्लोटिंग बूम्स, स्किमर्स, प्रदूषण नियंत्रण लैब, पोर्टेबल बार्जेस
  • फायर फाइटिंग: Fi-Fi Class 2 सिस्टम
  • ऑटोमेशन: डायनेमिक पोजिशनिंग, इंटीग्रेटेड ब्रिज, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट, पावर मैनेजमेंट
  • हथियार: 30 एमएम गन और दो 12.7 एमएम रिमोट-कंट्रोल्ड गन्स
  • क्रू: 14 अधिकारी और 115 कर्मचारी
  • बेस: कोच्चि

राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री संरक्षण में योगदान

ICGS समुद्र प्रताप सिर्फ एक जहाज नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीक और समुद्री संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका इस्तेमाल समुद्री प्रदूषण रोकने, तेल रिसाव का पता लगाने, आपात स्थितियों में राहत देने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। यह जहाज भारत के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल स्थापित करेगा।

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