11 वर्षीय बालक ने मां की डांट से की आत्महत्या, पिता ने बताया बेटे का स्वभाव था चिड़चिड़ा

11 वर्षीय बालक ने मां की डांट से की आत्महत्या, पिता ने बताया बेटे का स्वभाव था चिड़चिड़ा

मैहर के कोतर गांव में 11 साल के ऋतुराज की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। परिवार का कहना है कि मां की डांट से आहत होकर उसने जान दे दी। पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और जांच शुरू कर दी है।

Madhya Pradesh: मैहर जिले के मुकुंदपुर क्षेत्र के कोतर गांव में मंगलवार को 11 वर्षीय बालक ऋतुराज द्विवेदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि बालक उस दिन स्कूल नहीं गया था और गांव में साइकिल चला रहा था।

इस दौरान उसकी मां ने उसे डांटा। कुछ समय बाद ऋतुराज भूसा रखने वाले कमरे में चला गया, जहां बाद में उसे गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत परिजनों ने उसे मदद के लिए बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

परिवार ने बताई बालक की मानसिक स्थिति

मृतक के पिता चूड़ामणि द्विवेदी ने बताया कि ऋतुराज का स्वभाव पहले से ही चिड़चिड़ा और संवेदनशील था। पिता के अनुसार, पहले भी वह डांट से आहत होकर इसी तरह के कदम उठाने की प्रवृत्ति दिखा चुका था। परिवार ने बताया कि बालक अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर भावुक और चिंतित रहता था।

परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि अगर बालक को सही समय पर समझाया और संभाला जाता, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना टाली जा सकती थी।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही ताला थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन मौत की वास्तविक वजह का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही संभव होगा। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना के समय बालक के आसपास कौन-कौन मौजूद था और क्या कोई दबाव या तंग करने वाली परिस्थिति थी।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता ध्यान

यह घटना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक माहौल की अहमियत को उजागर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के साथ संवेदनशील संवाद और सही व्यवहार बहुत जरूरी है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या कठोर प्रतिक्रिया देने से बच्चे आहत हो सकते हैं और गंभीर कदम उठा सकते हैं। ऐसी घटनाएं परिवार और समाज के लिए चेतावनी हैं कि बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर समय-समय पर ध्यान देना आवश्यक है। 

पंचायत और स्कूल स्तर पर बच्चों की देखभाल और परामर्श की व्यवस्था होनी चाहिए। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से घटना के कारण और जिम्मेदारों का पता चलेगा।

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