मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत के बयान से सियासी हलचल, ‘तिलक लगाकर मीट खाने’ वाले बयान पर मचा बवाल

मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत के बयान से सियासी हलचल, ‘तिलक लगाकर मीट खाने’ वाले बयान पर मचा बवाल

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का एक बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी बहस का विषय बन गया है। टिकैत ने कुछ कथित हिंदू संगठनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे सार्वजनिक स्थलों पर “तिलक लगाकर मीट खाते हैं” और इससे एक राजनीतिक दल की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इस बयान के साथ ही उन्होंने ‘सुताई अभियान’ जैसी टिप्पणी भी की, जिसके बाद मामला और ज्यादा गरमा गया है।

कहां और कैसे आया बयान?

दरअसल, यह बयान उस समय सामने आया जब मुजफ्फरनगर जिला कलेक्ट्रेट में प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर फैक्ट्री मालिकों और किसानों के बीच एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान राकेश टिकैत से शहर के मीनाक्षी चौक का नाम बदलकर अटल चौक किए जाने को लेकर सवाल पूछा गया।

इस पर टिकैत ने कहा कि मीनाक्षी कौन थे, यह बहुत से लोग नहीं जानते, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को पूरा देश जानता है। उन्होंने साफ कहा कि चौक का नाम अटल चौक रखने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि अटल बिहारी वाजपेई एक राष्ट्रीय नेता रहे हैं।

हिंदू संगठनों पर जताई नाराजगी

इसी बातचीत के दौरान टिकैत ने कुछ कथित हिंदू संगठनों को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुद को हिंदू संगठन बताकर अटल चौक जैसे सार्वजनिक स्थानों पर तिलक लगाकर मांसाहार करते हैं और इससे माहौल खराब होता है। राकेश टिकैत ने कहा,

'कुछ लोग हिंदू संगठन के नाम पर ऐसी हरकतें करते हैं, जिससे एक राजनीतिक दल और समाज दोनों की छवि खराब होती है। बीजेपी का कार्यकर्ता इस तरह का आचरण नहीं करता। ये लोग जानबूझकर विवाद पैदा करना चाहते हैं।'

टिकैत का बयान यहीं नहीं रुका। उन्होंने आगे कहा,

'नाम हिंदू संगठन का लेते हैं और अटल चौक पर तिलक लगाकर मीट खाते हैं। एक-दो दिन में इनका सुताई अभियान भी चलेगा। जो वहां तिलक लगाकर मीट खाते हुए फंस जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी।'

इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे समाज में तनाव बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, तो वहीं कुछ समर्थक इसे टिकैत की बेबाक शैली का हिस्सा मान रहे हैं।

पहले भी विवादों में रहे हैं टिकैत

राकेश टिकैत के इस बयान के बाद स्थानीय प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं होने दी जाएगी। वहीं, राजनीतिक गलियारों में भी इस बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि कुछ नेताओं का आरोप है कि टिकैत जानबूझकर विवादास्पद भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब राकेश टिकैत अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। किसान आंदोलन के दौरान और उसके बाद भी उनके कई बयान राजनीतिक बहस का कारण बन चुके हैं। उनके समर्थक उन्हें किसानों की आवाज बताते हैं, जबकि आलोचक अक्सर उनके बयानों को भड़काऊ करार देते हैं।

 

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