मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 की सियासी तैयारियां अपने चरम पर हैं। 15 जनवरी को वोट डाले जाएंगे और नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी तस्वीर साफ होती जा रही है।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी वार्डों की चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। नामांकन वापसी की समयसीमा खत्म होने तक कुल 453 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लिए, जिसके बाद चुनावी मैदान में 1729 उम्मीदवार बचे हैं। मुंबई बीएमसी के 227 वार्डों में से वार्ड नंबर 2 (दहिसर) इस बार सबसे ज्यादा हाईप्रोफाइल बन गया है। इस वार्ड से बीजेपी ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना छोड़कर आईं तेजस्वी घोसालकर को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले पार्षद रह चुकी हैं।
वर्ष 2024 में उनके पति अभिषेक घोसालकर की फेसबुक लाइव के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तेजस्वी के ससुर और अभिषेक के पिता विनोद घोसालकर अब भी शिवसेना (यूबीटी) के साथ हैं। तेजस्वी के पार्टी बदलने के बाद उद्धव ठाकरे ने इस सीट से धनश्री कोलगे को मैदान में उतारा है।
तेजस्वी घोसालकर: बीजेपी की ताकत
तेजस्वी घोसालकर इस इलाके की पुरानी और लोकप्रिय नेता रही हैं। वह पहले पार्षद रह चुकी हैं और 2017 में एकीकृत शिवसेना से वार्ड नंबर 1 जीत चुकी हैं। फरवरी 2024 में उनके पति अभिषेक घोसालकर की बेरहमी से हत्या हो गई थी, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी थी। तेजस्वी के बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी ने पूरी ताकत उनके प्रचार में झोंक दी है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उनका समर्थन कर रहे हैं। तेजस्वी का चुनावी रणनीति में सिंपैथी कार्ड और पुरानी लोकप्रियता मुख्य हथियार माने जा रहे हैं।

धनश्री कोलगे: युवा और आक्रामक
दूसरी ओर, धनश्री कोलगे, शिवसेना यूबीटी की उम्मीदवार, युवा नेता हैं और युवा सेना की कार्यकारी समिति की सदस्य रही हैं। वह तेजस्वी घोसालकर के पहले दोस्त रही हैं, लेकिन अब प्रतिद्वंद्वी बन चुकी हैं। शिवसेना यूबीटी ने धनश्री को इस वार्ड में उतारकर सीधे तौर पर बीजेपी और तेजस्वी के खिलाफ चुनौती पेश की है। उन्हें मनसे का समर्थन भी प्राप्त है, जिससे उनके चुनावी प्रचार को मजबूती मिली है।
दहिसर वार्ड नंबर 2 का मुकाबला केवल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है। यह उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिए भी निर्णायक माना जा रहा है। तेजस्वी घोसालकर के ससुर विनोद घोसालकर, जो उद्धव ठाकरे के वफादार रहे हैं, इस बार अपने बहू के बीजेपी में शामिल होने के बाद राजनीतिक उलझन में फंसे हुए हैं।
अगर तेजस्वी जीतती हैं तो उनके ससुर और शिवसेना यूबीटी की प्रतिष्ठा को झटका लगेगा। वहीं, अगर धनश्री कोलगे जीतती हैं तो यह तेजस्वी और बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी।













