NBFC सेक्टर में मांग की वापसी, गोल्ड लोन और व्हीकल फाइनेंस बने ग्रोथ इंजन

NBFC सेक्टर में मांग की वापसी, गोल्ड लोन और व्हीकल फाइनेंस बने ग्रोथ इंजन

NBFC सेक्टर में लंबे समय बाद कर्ज की मांग सुधरती दिख रही है। गोल्ड लोन और वाहन फाइनेंस सेगमेंट ग्रोथ को सपोर्ट कर रहे हैं। इसी आधार पर मोतीलाल ओसवाल ने तीन NBFC शेयरों को टॉप पिक चुना है।

NBFC stocks: NBFC सेक्टर में लंबे समय बाद कर्ज की मांग को लेकर माहौल धीरे-धीरे बेहतर होता दिख रहा है। जहां बीते कुछ तिमाहियों में सुस्ती का असर साफ नजर आ रहा था, वहीं अब कुछ सेगमेंट में दोबारा रफ्तार लौटती दिखाई दे रही है। खासतौर पर गोल्ड लोन और व्हीकल फाइनेंस सेगमेंट ने सेक्टर को सपोर्ट देना शुरू कर दिया है। इसी बदलते ट्रेंड को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने तीन NBFC शेयरों को अपनी टॉप पिक में शामिल किया है।

दिसंबर 2025 तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि NBFC सेक्टर में रिकवरी की शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन सभी सेगमेंट में एक जैसी तेजी अभी नहीं आई है। कुछ हिस्से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ सेगमेंट अब भी दबाव में हैं।

NBFC सेक्टर में लोन ग्रोथ की मौजूदा तस्वीर

NBFC सेक्टर में कर्ज की मांग को लेकर तस्वीर फिलहाल मिली-जुली बनी हुई है। दिसंबर 2025 की तिमाही में कुछ कंपनियों ने अच्छी ग्रोथ दर्ज की, जबकि कुछ सेगमेंट में लोन ग्रोथ कमजोर रही। इससे यह साफ होता है कि सेक्टर में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन पूरी तरह मजबूत होने में अभी वक्त लगेगा।

बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों में स्थिरता और ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं ने NBFC सेक्टर की चाल को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में वही कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, जिनका फोकस सुरक्षित और कम जोखिम वाले लोन सेगमेंट पर है।

वाहन फाइनेंस सेगमेंट में मजबूत वापसी

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल वाहन फाइनेंस कंपनियों का प्रदर्शन सबसे मजबूत नजर आ रहा है। इस सेगमेंट का कुल कर्ज सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

इस तेजी के पीछे कई कारण हैं। त्योहारों का सीजन, जीएसटी में कटौती और पहले से रुकी हुई मांग ने वाहन खरीदारी को बढ़ावा दिया। लोगों ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों की खरीद के लिए ज्यादा लोन लिया, जिससे वाहन फाइनेंस कंपनियों के पोर्टफोलियो में तेजी आई।

ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में भी वाहन फाइनेंस की मांग सुधरती दिख रही है। इससे इस सेगमेंट में काम करने वाली NBFC कंपनियों को आने वाले समय में और फायदा मिलने की उम्मीद है।

गोल्ड लोन सेगमेंट बना सबसे तेज ग्रोथ वाला क्षेत्र

NBFC सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी गोल्ड लोन सेगमेंट में देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेगमेंट का कारोबार सालाना आधार पर करीब 39 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

गोल्ड की ऊंची कीमतों और लोगों की त्वरित नकदी जरूरतों ने गोल्ड लोन की मांग को बढ़ाया है। इस सेगमेंट में मुथूट फाइनेंस का प्रदर्शन खासतौर पर मजबूत रहा है, जहां गोल्ड लोन का कारोबार करीब 48 प्रतिशत तक बढ़ा है।

गोल्ड लोन को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें सोना गिरवी रखा जाता है। यही वजह है कि NBFC कंपनियां इस सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही हैं और निवेशकों का भरोसा भी यहां बना हुआ है।

हाउसिंग फाइनेंस में ग्रोथ लेकिन चुनौतियां बरकरार

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में करीब 11 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी का अनुमान है। हालांकि, डिस्बर्समेंट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं।

इसकी एक बड़ी वजह बैंकों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। बैंक सस्ते ब्याज दरों पर होम लोन ऑफर कर रहे हैं, जिससे NBFC आधारित हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, तिमाही के दौरान छुट्टियों की वजह से भी लोन डिस्बर्समेंट पर असर पड़ा।

हालांकि, सस्ती हाउसिंग फाइनेंस पर फोकस करने वाली कंपनियों के लिए आगे की राह थोड़ी बेहतर नजर आ रही है।

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर अब भी दबाव में

माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट की बात करें तो यहां स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है। इस सेगमेंट में कंपनियों का कुल कर्ज या तो घट सकता है या फिर बिना ज्यादा बढ़ोतरी के स्थिर रह सकता है। लोन देने वाली कंपनियां फिलहाल जोखिम लेने से बच रही हैं। वे नए ग्राहकों को कर्ज देने के बजाय एसेट क्वालिटी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसी वजह से कई लोन आवेदन खारिज किए जा रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों में आय पर दबाव और पिछली कुछ तिमाहियों में बढ़े डिफॉल्ट ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की रणनीति को सतर्क बना दिया है।

उधारी सस्ती, लेकिन फायदा सभी को बराबर नहीं

NBFC कंपनियों की उधारी लागत में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इसके बावजूद इसका फायदा हर सेगमेंट को समान रूप से नहीं मिल रहा है। बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, सस्ती हाउसिंग फाइनेंस और वाहन फाइनेंस कंपनियों को उधारी सस्ती होने का ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।

गोल्ड लोन कंपनियों के मार्जिन भी अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं, क्योंकि इस सेगमेंट में जोखिम कम और रिटर्न बेहतर रहता है।

एसेट क्वालिटी में स्थिरता के संकेत

NBFC सेक्टर के ज्यादातर सेगमेंट में एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों में बैड लोन की स्थिति धीरे-धीरे सुधरने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सेगमेंट में पूरी तरह सामान्य स्थिति आने में अभी कुछ और तिमाहियों का समय लग सकता है। अन्य सेगमेंट जैसे वाहन फाइनेंस और गोल्ड लोन में एसेट क्वालिटी अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।

NBFC सेक्टर में मुनाफे की तस्वीर

आगे की बात करें तो NBFC सेक्टर के शुद्ध मुनाफे में करीब 26 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी का अनुमान है। अगर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को इस गणना से अलग कर दिया जाए, तो मुनाफा करीब 19 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

इसका मतलब यह है कि सेक्टर के भीतर भी प्रदर्शन में बड़ा अंतर बना हुआ है। सुरक्षित और विविध लोन देने वाली कंपनियां आगे बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

मोतीलाल ओसवाल की टॉप NBFC पिक

इन सभी हालात को ध्यान में रखते हुए ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि वाहन फाइनेंस, गोल्ड लोन और डाइवर्सिफाइड लेंडिंग पर फोकस करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है।

इसी आधार पर ब्रोकरेज ने तीन NBFC शेयरों को अपनी टॉप पिक बताया है। इनमें श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस, PNB हाउसिंग फाइनेंस और आदित्य बिड़ला कैपिटल शामिल हैं। इन कंपनियों का बिजनेस मॉडल अपेक्षाकृत मजबूत है और ये उन सेगमेंट में काम कर रही हैं, जहां मांग तेजी से लौट रही है।

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