देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के तहत सरकार ने 44 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है। इन संस्थानों के शुरू होने से 2026-27 सत्र से MBBS की 11 हजार से अधिक नई सीटें जुड़ेंगी। इससे NEET UG अभ्यर्थियों को राहत मिलने और देश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने की उम्मीद है।
MBBS Seats Increase: केंद्र सरकार ने मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से देशभर में 44 नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दी है, जो एकेडमिक सेशन 2025-26 के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इन कॉलेजों के शुरू होने से 2026-27 से MBBS की 11 हजार से अधिक अतिरिक्त सीटों पर दाखिला संभव होगा। इसके साथ ही देश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 824 हो जाएगी। सीटों में बढ़ोतरी का लाभ खासतौर पर NEET UG देने वाले छात्रों को मिलेगा, जिन्हें सीमित सीटों के कारण पहले कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था। साथ ही मेडिकल की PG सीटों में भी लगभग 8967 की वृद्धि की गई है, जिससे भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
44 नए मेडिकल कॉलेजों को मिली मंजूरी
सरकार की ओर से मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में एकेडमिक सेशन 2025-26 के लिए देशभर में 44 नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दी गई है।
इन नए कॉलेजों के शुरू होने से एकेडमिक सेशन 2026-27 से MBBS की 11 हजार से अधिक अतिरिक्त सीटों पर एडमिशन संभव होगा। इसके बाद देश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 780 से बढ़कर 824 हो गई है, जो मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का बड़ा संकेत है।

MBBS सीटें बढ़ने से NEET UG छात्रों को फायदा
MBBS सीटों की संख्या बढ़ने से NEET UG देने वाले छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धा थोड़ी संतुलित हो सकती है। पहले सीटों की सीमित संख्या के कारण कई योग्य छात्र एडमिशन से वंचित रह जाते थे।
नई सीटें जुड़ने से अब ज्यादा छात्रों को भारत में ही मेडिकल की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। इससे विदेशी मेडिकल कॉलेजों पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
मेडिकल की PG सीटों में भी इजाफा
सरकार ने सिर्फ MBBS ही नहीं बल्कि मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट सीटों में भी बढ़ोतरी की है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार PG मेडिकल सीटों में 8967 की बढ़ोतरी की गई है।
इन सीटों में All India Institute of Medical Sciences और अन्य इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस (INIs) के संस्थानों की सीटें भी शामिल हैं। इससे स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।











