सनातन धर्म में साल भर में चार नवरात्रि आते हैं, जिनमें से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय माने जाते हैं। चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से राम जन्मोत्सव से जुड़ी होती है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं और व्रत रखते हैं।
Chaitra Navratri: हिंदू कैलेंडर में हर महीने का अपना अलग महत्व होता है और चैत्र माह की शुरुआत के साथ ही हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ हो जाता है। नए साल के साथ ही चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा और आराधना की जाती है। इस दौरान व्रत और मां अंबे की उपासना का विशेष महत्व है, क्योंकि यह समय आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए अनुकूल माना जाता है।
हालांकि, कई लोग पूरे नौ दिन का व्रत नहीं रख पाते, इसलिए इस दौरान पहले दिन और अष्टमी का व्रत विशेष रूप से रखा जाता है। इन दिनों की पूजा में विशेष विधि और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। घट स्थापना के दौरान मां दुर्गा के लिए मिट्टी या धातु का पवित्र पात्र (घट) स्थापित किया जाता है, जिसमें जल, चावल, फूल, कपूर और आम के पत्ते रखकर पूजा की जाती है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन व्रत की सही तारीख, घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीख
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। यह नौ दिन का पर्व मां दुर्गा की पूजा और व्रत के साथ उत्साहपूर्ण रूप से मनाया जाता है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ आरंभ होता है। प्रथम दिन (प्रतिपदा) 19 मार्च 2026, सुबह 6:52 बजे शुरू होकर 20 मार्च 2026, सुबह 4:52 बजे तक रहेगा।
अधिकांश भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ केवल पहले दिन और अष्टमी का व्रत रखते हैं। चैत्र नवरात्रि को लेकर यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रतिपदा तिथि के शुभ मुहूर्त में पूजा और व्रत संकल्प करने से धार्मिक लाभ और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, घट स्थापना का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:
- मुख्य शुभ मुहूर्त: सुबह 6:52 से 7:53 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 तक
यदि कोई जातक सुबह के शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाया, तो अभिजीत मुहूर्त में यह कार्य किया जा सकता है। घट स्थापना से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
पहले दिन व्रत का संकल्प कैसे लें
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन व्रत रखने से पहले निम्नलिखित विधि अपनाई जाती है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
- हाथ में अक्षत (चावल), लाल फूल और जल लेकर माता दुर्गा के सामने व्रत का संकल्प लें।
- संकल्प लेते समय मन में यह भावना रखें कि आप नवरात्रि के दौरान माता रानी की पूजा और व्रत नियमित रूप से करेंगे।
- संकल्प के बाद घर के पूजा स्थान पर कलश स्थापना करें।
कलश स्थापना की विधि

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना से माता रानी की पूजा आरंभ होती है। इस विधि को अपनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल प्राप्त होती है:
- स्थान चयन: घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर चौकी रखें।
- कपड़ा बिछाना: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- मूर्ति या फोटो: माता दुर्गा की फोटो या प्रतिमा रखें।
- अखंड ज्योति: यदि संभव हो तो अखंड दीप जलाएं। नहीं तो सुबह और शाम पूजा के समय दीपक अवश्य जलाएं।
- जौ बोना: एक पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं।
- कलश सजाना: तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें और उसमें चावल, सुपारी आदि डालें।
- आम के पत्ते और नारियल: कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल स्थापित करें।
- पूजा और आरती: दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान करें।
चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह पर्व न केवल मां दुर्गा की उपासना का अवसर है, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। इस दौरान व्रत और उपासना से मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है।
- मां शैलपुत्री: पहले दिन की आराधना देवी शैलपुत्री को समर्पित होती है।
- भक्त इस दिन व्रत रखकर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और सफलता की कामना करते हैं।
- नवरात्रि के दौरान किए गए व्रत और पूजा से परिवार में सौभाग्य और खुशहाली आती है।
व्रत और पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- व्रत के दौरान शुद्ध और सात्विक भोजन करें।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा करें।
- कलश स्थापना और पूजा विधि को सही मुहूर्त में करें।
- व्रत के दौरान माता दुर्गा की कथा और आरती पढ़ें।
- अष्टमी और नवमी के व्रत विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन का उपवास और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च 2026 है। इस दिन से नौ दिन तक माता दुर्गा की पूजा और व्रत रखने से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली आती है। इस पर्व के दौरान सही विधि और मुहूर्त का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।











