नेपाल चुनाव 2026 में रवि लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। पार्टी दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई है। इस जीत के साथ बालेंद्र शाह के नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की संभावना भी बढ़ गई है।
काठमांडू: नेपाल के संसदीय चुनाव 2026 के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। सोमवार सुबह तक आए चुनाव परिणामों और रुझानों के अनुसार रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है। शुरुआती आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि इस बार मतदाताओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों के बजाय एक नए विकल्प को मजबूत समर्थन दिया है।
ताजा नतीजों के मुताबिक पार्टी न केवल सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है बल्कि वह संसद में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब भी पहुंचती दिखाई दे रही है। इस परिणाम ने नेपाल की राजनीति के पुराने समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है और पूरे दक्षिण एशिया में इसकी चर्चा हो रही है।
प्रत्यक्ष मतदान में आरएसपी का दबदबा
सोमवार सुबह करीब सात बजे तक घोषित परिणामों के अनुसार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत 124 सीटें जीत ली हैं और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। नेपाल की संसद में प्रत्यक्ष मतदान के जरिए कुल 165 सीटों पर चुनाव होता है, जिनमें से अब तक 161 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं।
केवल चार सीटों के परिणाम आना बाकी हैं और उम्मीद है कि उनके नतीजे भी जल्द सामने आ जाएंगे। मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह साफ संकेत मिल रहा है कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी प्रत्यक्ष चुनावों में भी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और उसके समर्थन में जबरदस्त जनमत देखने को मिल रहा है।
आनुपातिक मतदान में भी मिला भारी समर्थन
नेपाल के संसदीय चुनावों में प्रत्यक्ष मतदान के साथ-साथ आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली भी लागू होती है, जिसमें पार्टियों को मिले कुल वोटों के आधार पर सीटें मिलती हैं। इस प्रणाली में भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को सबसे ज्यादा समर्थन मिला है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार पार्टी को लगभग 37,89,803 वोट मिल चुके हैं, जो अन्य सभी दलों से काफी अधिक हैं।

नेपाली कांग्रेस को करीब 12,75,594 वोट मिले हैं जबकि सीपीएन-यूएमएल को लगभग 10,79,726 वोट प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा एनसीपी को करीब 5,55,300 वोट मिले हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि देशभर में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को समर्थन दिया है और यही कारण है कि पार्टी दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है।
अन्य दलों का कमजोर प्रदर्शन
चुनाव परिणामों में पारंपरिक दलों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। नेपाली कांग्रेस अब तक 17 सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर आगे चल रही है। सीपीएन-यूएमएल ने आठ सीटें अपने नाम की हैं और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। एनसीपी ने सात सीटें हासिल की हैं।
इसके अलावा श्रम संस्कृति पार्टी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि राष्ट्रीय प्रगतिशील पार्टी (RPP) और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक सीट जीती है। इन परिणामों से यह साफ हो गया है कि इस चुनाव में मतदाताओं ने पुराने राजनीतिक दलों को कम समर्थन दिया है और नई राजनीतिक ताकतों को आगे बढ़ने का मौका दिया है।
नेपाल को मिल सकता है नया युवा नेतृत्व
इन चुनाव परिणामों के साथ ही नेपाल को एक नया और युवा नेतृत्व मिलने की संभावना भी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अगर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सरकार बनाती है तो बालेंद्र शाह देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। ऐसा होने पर वह नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री होंगे।
इसके साथ ही उन्हें देश का पहला मधेसी प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी मिल सकता है। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता पहले से ही काफी अधिक मानी जाती है और चुनाव परिणामों के बाद उनका नाम प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदारों में सबसे आगे माना जा रहा है।
‘रवि लहर’ क्यों बनी चर्चा का केंद्र
नेपाल के इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा ‘रवि लहर’ की हो रही है। रवि लामिछाने के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने पूरे राजनीतिक माहौल को बदल दिया है। रवि लामिछाने पहले एक प्रसिद्ध पत्रकार और टेलीविजन एंकर रहे हैं और राजनीति में आने के बाद उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और पारदर्शी शासन की बात की।











