ईरान के तेल से अमेरिका का स्वार्थ! Donald Trump पर देश के टुकड़े करने की साजिश का आरोप

ईरान के तेल से अमेरिका का स्वार्थ! Donald Trump पर देश के टुकड़े करने की साजिश का आरोप

प्रोफेसर फोआद इजादी ने दावा किया कि अमेरिका और इज़राइल ईरान को छोटे हिस्सों में बांटने की साजिश रच रहे हैं। योजना का मकसद सरकार को कमजोर करना और तेल-सम्पन्न क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करना है।

Iran News: तेहरान के प्रोफेसर फोआद इजादी ने एक सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका और इज़राइल मिलकर ईरान को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने (बाल्कनाइजेशन) की योजना बना रहे हैं। उनके अनुसार यह साजिश ईरान की सरकार को खत्म करने और देश के भूगोल को बदलने के मकसद से तैयार की गई है। प्रोफेसर इजादी ने डोनाल्ड ट्रंप के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप ने खुद संकेत दिए थे कि युद्ध के बाद ईरान का नक्शा आज जैसा नहीं रहेगा। यह बयान उनके अनुसार सीधे तौर पर ईरान के तेल-संपन्न इलाकों को अलग करने की तैयारी का संकेत है।

तेल-संपन्न इलाकों पर कब्जे की योजना

प्रोफेसर ने दावा किया कि ट्रंप की मुख्य दिलचस्पी ईरान के उन हिस्सों में है जहां तेल का भारी भंडार है। उनका कहना है कि अमेरिका फारस की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित तेल से भरपूर इलाकों को ईरान से अलग कर सकता है और वहां अपना नियंत्रण स्थापित कर सकता है। उनके अनुसार ट्रंप को तेल का भौतिक और आर्थिक लाभ चाहिए, चाहे वह वेनेजुएला का हो या ईरान का। बाकी ईरान, जहां तेल कम है, उसे पड़ोसी देशों के लिए खुला छोड़ दिया जाएगा या कमजोर बना दिया जाएगा।

ईरान की सरकार को निशाना बनाने का आरोप

फोआद इजादी ने यह भी कहा कि अमेरिका और इज़राइल मिलकर ईरान की मौजूदा सरकार को पूरी तरह ढहाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति या अन्य शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने की योजना बनाई जा सकती है ताकि देश की प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना कमजोर हो जाए। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों को नियंत्रित करना आसान होगा और भूगोल में बदलाव संभव होगा। उनका मानना है कि यह पूरी रणनीति ईरान को एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

ईरान की भौगोलिक स्थिति 

ईरान दुनिया का 17वां सबसे बड़ा देश है, जो लगभग 16.5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसकी विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह भारत के आकार का लगभग आधा और इज़राइल से 80 गुना बड़ा है। ईरान की सीमाएं सात देशों से मिलती हैं, जिनमें इराक के साथ सबसे लंबी सीमा है। 

इसके अलावा तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अजरबैजान, तुर्की और आर्मेनिया इसके पड़ोसी देश हैं। इस भौगोलिक स्थिति के कारण ईरान का क्षेत्रीय महत्व काफी अधिक है, खासकर तेल और प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से।

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