साल 2025 में जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों के बाद Nepal में पहला आम चुनाव संपन्न हो चुका है और आज इसके नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं। House of Representatives of Nepal के लिए हुए इस चुनाव के शुरुआती रुझानों में Balen Shah की आरएसपी ने सबको चौंकाते हुए 23 सीटों पर बढ़त बना ली है।
काठमांडू: नेपाल में हुए आम चुनावों के शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेत दिया है। प्रतिनिधि सभा के लिए हुए चुनाव में Balen Shah से जुड़ी पार्टी Rastriya Swatantra Party (आरएसपी) ने शुरुआती बढ़त बनाकर सभी को चौंका दिया है। शुरुआती मतगणना के अनुसार, आरएसपी करीब 23 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि देश की प्रमुख पारंपरिक पार्टियां काफी पीछे दिखाई दे रही हैं।
यह चुनाव पिछले साल हुए बड़े राजनीतिक संकट और युवा आंदोलन के बाद आयोजित किया गया पहला राष्ट्रीय चुनाव है, इसलिए इसे नेपाल की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
पारंपरिक दलों को शुरुआती झटका
चुनाव के शुरुआती रुझानों में नेपाल की दो प्रमुख पार्टियां—Nepali Congress और Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) (सीपीएन-यूएमएल)—सिर्फ तीन-तीन सीटों पर ही आगे चलती दिख रही हैं। इन दलों ने दशकों तक नेपाल की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाई है, लेकिन शुरुआती आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि मतदाता इस बार बदलाव के मूड में हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं और शहरी मतदाताओं का झुकाव नई और वैकल्पिक राजनीति की ओर बढ़ रहा है, जिसका फायदा आरएसपी को मिल रहा है।

वोटों की गिनती जारी
नेपाल के Election Commission Nepal के अनुसार, वोटों की गिनती गुरुवार देर रात शुरू हुई थी और शुक्रवार रात तक अधिकांश सीटों के अंतिम परिणाम घोषित होने की संभावना है। चुनाव में देशभर में करीब 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण भागीदारी मानी जा रही है।
मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और अब सभी की नजर अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है, जो आने वाले वर्षों के लिए देश की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं। नेपाल में यह चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पिछले साल हुए बड़े जनआंदोलन के बाद आयोजित हुआ है। 2025 में देश में व्यापक युवा आंदोलन देखने को मिला था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं—खासकर जेन-जी—ने सड़कों पर उतरकर राजनीतिक बदलाव की मांग की थी। इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य तत्कालीन प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था।
प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हिंसक झड़पें भी हुईं, जिसके बाद देश की राजनीति में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। अंततः इस राजनीतिक संकट के बाद नए आम चुनाव कराने का फैसला लिया गया।











