पटना में जदयू और मुकुंद सेना के कार्यकर्ताओं ने निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की मांग को लेकर 12 घंटे की भूख हड़ताल की। मंत्री दीपक प्रकाश और जदयू अध्यक्ष संजय झा ने इसका समर्थन किया।
Patna: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चा जोर पकड़ रही है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) और उसके सहयोगी दलों की ओर से निशांत को राजनीति में लाने की मांग बढ़ती जा रही है। हाल ही में पटना में जदयू से जुड़े मुकुंद सेना के कार्यकर्ताओं ने 12 घंटे की भूख हड़ताल कर निशांत कुमार की राजनीति में भागीदारी की मांग की।
आरएलएम के मंत्री दीपक प्रकाश और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए युवाओं को राजनीति में आने की आवश्यकता पर जोर दिया।
12 घंटे की भूख हड़ताल में भाग लेने वाले कार्यकर्ता
भारी ठंड के बावजूद पटना के गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पर मुकुंद सेना के कार्यकर्ताओं ने निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग को लेकर 12 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की। इस आंदोलन का नेतृत्व मुकुंद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकुंद कुमार ने किया।
मुकुंद कुमार ने कहा कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे और समर्पित युवा हैं। उन्हें राजनीति में अवसर मिलना चाहिए ताकि वे पार्टी के साथ मिलकर बिहार की बागडोर संभाल सकें। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगली बार जेपी गोलंबर के नीचे 24 घंटे की भूख हड़ताल की जाएगी।
निशांत कुमार को उत्तराधिकारी के रूप में लाने की मांग

भूख हड़ताल में शामिल आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की कि वे निशांत कुमार को पार्टी में राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपें। उनका कहना है कि निशांत कुमार को सीएम की छत्रछाया में राजनीति में आने का मौका मिलना चाहिए। सभी जाति और धर्म के लोग निशांत में बिहार के भविष्य को देखते हैं और उन्हें जिम्मेदारी देने का समर्थन कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि निशांत को संगठन और पार्टी के लोगों के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है। इसके लिए अक्टूबर से ही हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। भूख हड़ताल में अजय कुमार सिंह, रविरंजन सिंह, संतोष वैश्य समेत कई अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए।
मंत्री दीपक प्रकाश और जदयू के संजय झा का समर्थन
आरएलएम के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि युवाओं को राजनीति में आने का मौका मिलना चाहिए। उनका कहना है कि युवा नेतृत्व नए विचार और ऊर्जा लाता है और राजनीति में बदलाव की दिशा में योगदान कर सकता है।
संजय झा ने भी निशांत कुमार की राजनीति में भागीदारी का समर्थन किया और कहा कि यह फैसला अंततः निशांत कुमार को ही लेना है। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि परिवार और पार्टी दोनों ही इस मामले में उनका मार्गदर्शन करेंगे।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री
विशेषज्ञ मानते हैं कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री से बिहार की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव आ सकता है। जदयू और एनडीए के सहयोगी दलों की ओर से युवा नेता के रूप में उन्हें राजनीति में अवसर देने की मांग पार्टी की युवा शक्ति और संगठनात्मक मजबूती को बढ़ा सकती है।
अधिकारियों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार को राजनीति में लाने से पार्टी को नए दृष्टिकोण और युवा नेतृत्व मिलेगा। इससे न केवल पार्टी की लोकप्रियता बढ़ सकती है, बल्कि संगठनात्मक ढांचे में भी मजबूती आएगी।









