पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के दौरे पर विवाद, केंद्र ने राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के दौरे पर विवाद, केंद्र ने राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

West Bengal में Droupadi Murmu के दौरे को लेकर विवाद बढ़ गया है। Ministry of Home Affairs (India) ने प्रोटोकॉल पालन को लेकर राज्य सरकार के चीफ सेक्रेटरी से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

New Delhi: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के दौरे को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के पालन को लेकर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के चीफ सेक्रेटरी से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान राज्य प्रशासन की ओर से किए गए सभी इंतजामों की जानकारी दी जाए। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह रिपोर्ट तय समय के भीतर भेजी जाए ताकि पूरे मामले की समीक्षा की जा सके। इस घटनाक्रम के बाद राज्य और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा तेज हो गई है।

गृह मंत्रालय ने शाम तक मांगा पूरा विवरण

सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट भेजें। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट शाम 5 बजे तक भेजी जानी चाहिए।

इस रिपोर्ट में यह बताया जाना होगा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान राज्य प्रशासन ने प्रोटोकॉल के अनुसार क्या-क्या व्यवस्थाएं की थीं। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा, स्वागत और अन्य प्रशासनिक तैयारियां किस तरह की गई थीं।

केंद्र सरकार का मानना है कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के कार्यक्रम के दौरान तय नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है। इसलिए इस पूरे मामले में तथ्यात्मक जानकारी हासिल करना जरूरी समझा गया है।

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद

हाल के दिनों में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर कुछ मुद्दे सामने आए थे। इन घटनाओं के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच मतभेद की स्थिति बन गई।

राज्य सरकार की ओर से भी कुछ आरोप लगाए गए, जिनके बाद यह मामला और चर्चा में आ गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगने का फैसला किया।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार पूरे मामले की समीक्षा करेगी और यह देखा जाएगा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान सभी नियमों और प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं।

राष्ट्रपति की यात्रा में प्रोटोकॉल

भारत में राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होते हैं। इसलिए उनकी यात्रा और कार्यक्रमों के दौरान बहुत सख्त प्रोटोकॉल लागू किया जाता है।

इन प्रोटोकॉल का उद्देश्य राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उनके पद की गरिमा बनाए रखना और कार्यक्रमों को सुचारू रूप से आयोजित करना होता है। इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कार्यक्रम के संचालन तक हर चीज पहले से तय नियमों के अनुसार होती है। इसमें स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यात्रा के दौरान अधिकांश व्यवस्थाएं राज्य सरकार के जिम्मे होती हैं।

मिनट-टू-मिनट तय होता है पूरा कार्यक्रम

राष्ट्रपति के किसी भी दौरे का कार्यक्रम पहले से विस्तार से तैयार किया जाता है। इसे मिनट-टू-मिनट योजना के आधार पर तैयार किया जाता है ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

इस योजना को पहले से संबंधित एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मंजूरी दी जाती है। उसके बाद उसी के अनुसार पूरा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

सामान्य परिस्थितियों में इस तय कार्यक्रम में अचानक बदलाव नहीं किया जाता। अगर किसी कारण से बदलाव की जरूरत होती है तो उसके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।

Leave a comment