कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को देश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दायर किए गए कानूनी मामले आरएसएस के बारे में उनके द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में शुरू किए गए हैं।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरएसएस को देश के विकास में सबसे बड़ा बाधा बताते हुए कहा कि संगठन के खिलाफ उठाए गए सवालों के कारण उनके और साथी मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया गया है।
नोटिस पर प्रतिक्रिया
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक अखबार का लेख साझा किया, जिसमें बताया गया कि आरएसएस के एक सदस्य द्वारा उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके चलते एक विशेष अदालत ने खरगे और राव को नोटिस जारी किया। अपने पोस्ट में प्रियांक खरगे ने कहा,
'कुछ चुनिंदा लोगों का समूह अपने कठपुतलियों का इस्तेमाल करके हमारे खिलाफ मामले दर्ज करवा रहा है, सिर्फ इसलिए कि हम आरएसएस पर जायज सवाल उठा रहे हैं।'
उन्होंने कहा कि आरएसएस राष्ट्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन चुका है और इस पर सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

आरएसएस के वित्तीय मामलों पर उठाए सवाल
खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संगठन अपने स्वयंसेवकों द्वारा दिए गए चंदे पर चलता है। इस दावे पर खरगे ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए:
- ये स्वयंसेवक कौन हैं और उनकी पहचान कैसे होती है?
- दिए गए दान का पैमाना और स्वरूप क्या है?
- ये दान किन माध्यमों से प्राप्त होते हैं?
- यदि आरएसएस पारदर्शी तरीके से काम करता है, तो दान सीधे संगठन को उसकी पंजीकृत पहचान के तहत क्यों नहीं दिया जाता?
- संगठन की वित्तीय और परिचालन संरचना कैसे काम करती है?
- पूर्णकालिक प्रचारकों को वेतन कौन देता है और बड़े पैमाने पर आयोजनों का खर्च कौन उठाता है?
खरगे ने आगे कहा कि आरएसएस की व्यापक उपस्थिति और सामाजिक प्रभाव के बावजूद संगठन अब तक पंजीकृत नहीं है। उन्होंने पूछा, जब भारत में प्रत्येक धार्मिक या धर्मार्थ संस्था के लिए वित्तीय पारदर्शिता अनिवार्य है, तो आरएसएस के लिए ऐसी जवाबदेही का अभाव किस आधार पर उचित है? खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्वयंसेवक स्थानीय कार्यालयों से वर्दी या अन्य सामग्री खरीदते हैं, तो इसकी लेखा-जोखा व्यवस्था कहाँ रखी जाती है। इसके अलावा स्थानीय कार्यालयों और अन्य बुनियादी ढांचे के रखरखाव का खर्च कौन उठाता है?
इस साल की शुरुआत में प्रियांक खरगे ने सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और राज्य के स्वामित्व वाले मंदिरों में आरएसएस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि सरकारी संस्थानों में पाठ्यक्रम से बाहर की गतिविधियों के लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था।









