हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ ने आज अपना 32वां स्थापना दिवस भव्य और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया। इस अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव और पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने संस्थान की तीन दशक से अधिक की यात्रा और भविष्य की वैश्विक योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
नई दिल्ली: पतंजलि योगपीठ ने आज पूरे उत्साह और हर्षोल्लास के साथ अपना 32वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस विशेष अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि की अब तक की यात्रा, उसकी प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य के संकल्पों पर प्रकाश डाला। समारोह के दौरान पतंजलि के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने योग, मलखम्भ और मार्शल आर्ट्स का आकर्षक और भव्य प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शुरुआत
स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत पतंजलि के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत योगासन, मलखंभ और मार्शल आर्ट्स के आकर्षक प्रदर्शनों से हुई। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक परंपराओं की शक्ति को मंच पर जीवंत कर दिया। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य युवाओं में योग, अनुशासन और आत्मबल के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि आने वाले समय में सनातन जीवन पद्धति पूरी दुनिया की प्रमुख जीवनशैली बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी भविष्य में वैश्विक स्तर पर मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य पद्धतियों के रूप में स्थापित होंगी। स्वामी रामदेव ने कहा, हमारा लक्ष्य है कि विश्व की 80 से 90 प्रतिशत आबादी सनातन मूल्यों को अपनाए। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि विज्ञान, स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का मार्ग है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा आज के आधुनिक समाज की कई समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है, और पतंजलि इसी सोच को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए कार्य कर रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक दृष्टि
स्वामी रामदेव ने भारतीय शिक्षा प्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि जब देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय बनेगी, तब भारतीय रुपये और भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक साख भी बढ़ेगी। उन्होंने एक ऐसे भारत की परिकल्पना की, जहां दुनिया के 200 से अधिक देशों के छात्र शिक्षा के लिए आएंगे।
उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में ‘पतंजलि ग्लोबल यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की जाएगी, जिसमें आधुनिक विज्ञान, तकनीक, प्रबंधन और परंपरागत भारतीय ज्ञान का समन्वय होगा। इसका उद्देश्य वैश्विक नागरिकों को भारतीय मूल्यों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
संघर्षों से सफलता तक की यात्रा
आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि की स्थापना से लेकर आज तक की यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि पिछले 32 वर्षों में संस्थान ने कई उतार-चढ़ाव और कठिन चुनौतियों का सामना किया, लेकिन स्वामी रामदेव के ‘अखंड पुरुषार्थ’ और समर्पण से पतंजलि आज एक वैश्विक पहचान बन चुका है।
उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े सरकारी सहयोग के पतंजलि ने शिक्षा, स्वास्थ्य, योग, आयुर्वेद और कृषि जैसे क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। विशेष रूप से एफएमसीजी सेक्टर में पतंजलि की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी के आने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी मनमानी कीमतों और नीतियों पर नियंत्रण करना पड़ा।











