देश में सोना और चांदी के कारोबारियों के लिए बड़ा झटका लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुलियन आयात पर एडवांस रेमिटेंस (पूर्व भुगतान) पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि अब आयातक सोना या चांदी मंगाने के लिए पहले भुगतान नहीं कर सकेंगे।
बिजनेस न्यूज़: देश में सोना-चांदी के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बुलियन यानी सोना और चांदी के आयात पर एडवांस रेमिटेंस (पहले भुगतान) पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद बुलियन कारोबारियों और इंपोर्टर्स में हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि RBI का यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग और फंड्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
RBI ने क्यों लिया यह कदम?
RBI का यह निर्णय मनी लॉन्ड्रिंग और फंड्स के गलत इस्तेमाल को रोकने की दिशा में उठाया गया है। भारत में सोना और कच्चा तेल मूल्य के हिसाब से सबसे बड़े आयातित उत्पादों में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में विदेशी भुगतान के बाद आयातित सामान नहीं आता, जिससे पैसा संदिग्ध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
साजल गुप्ता, नुवामा के फॉरेक्स और कमोडिटी हेड का कहना है, "जब एडवांस पेमेंट के बावजूद सोना या अन्य धातु नहीं आती, तो भेजा गया पैसा संदिग्ध हो सकता है। RBI संभवतः इसी रास्ते को बंद करना चाहता है।"
नए फॉरेक्स नियम और प्रक्रिया
RBI ने नए फॉरेक्स मैनेजमेंट नियमों के तहत प्रक्रियाओं में सरलता और एकरूपता लाने का प्रयास किया है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं, अब थर्ड पार्टी पेमेंट और रिसीट की अनुमति दी गई है। इसका मतलब है कि एक ही विदेशी खरीदार या सप्लायर, या उनकी ग्रुप कंपनियों के बीच निर्यात और आयात की देनदारियों को बैंक की अलग अनुमति के बिना जोड़ा जा सकेगा।
यदि तय समय या बढ़ाई गई अवधि में आयात पूरा नहीं होता है, तो इंपोर्टर को एडवांस में भेजी गई राशि वापस भारत लानी होगी। अगर राशि वापस नहीं लायी गई, तो भविष्य में एडवांस रेमिटेंस के लिए सख्त शर्तें लागू होंगी, जैसे इंटरनेशनल बैंक की गारंटी या इंडियन रजिस्टर्ड डीलर द्वारा काउंटर गारंटी। सोना और चांदी के अलावा अन्य वस्तुओं के आयात पर अब बैंकों को एडवांस पेमेंट की सीमा तय करने का अधिकार मिला है। तय सीमा से अधिक भुगतान पर स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (SBLC) या गारंटी अनिवार्य हो सकती है। RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन पूरी तरह बैंकों की जिम्मेदारी होगी।

नियम कब से लागू होंगे?
RBI के नए नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे। केंद्रीय बैंक का कहना है कि ये बदलाव छोटे इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए हैं। हालांकि, बुलियन कारोबारियों के लिए इसका असर तुरंत दिखाई देगा, क्योंकि सोना-चांदी के व्यापार में एडवांस रेमिटेंस सामान्य प्रक्रिया रही है।
- सोना और चांदी के आयात में देरी: एडवांस रेमिटेंस पर रोक से बुलियन की खरीद प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
- कैश फ्लो पर दबाव: आयातक अब भुगतान करने के लिए अन्य वित्तीय साधनों पर निर्भर होंगे।
- मनी लॉन्ड्रिंग का जोखिम कम: RBI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पैसा गलत रास्ते से देश से बाहर न जाए।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह नियम लंबी अवधि में बुलियन कारोबार को पारदर्शी बनाएगा, हालांकि शुरुआती दौर में व्यापारियों को संकट और वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।











