राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस वर्ष हरियाणा के Samalkha में 13 मार्च से 15 मार्च 2026 तक आयोजित हो रही है। संघ की दृष्टि से यह बैठक सर्वोच्च निर्णायक इकाई की होती है।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संगठन में बड़े बदलाव की संभावना है। संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस साल हरियाणा के समालखा में 13 मार्च से 15 मार्च 2026 तक आयोजित होने जा रही है। यह बैठक RSS की सर्वोच्च निर्णायक इकाई की बैठक मानी जाती है, जिसमें संगठन की नीतियों और भविष्य की दिशा पर निर्णय लिया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में संघ की संरचना और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से संघ अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठनात्मक बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। यदि बैठक में प्रस्ताव पारित होते हैं, तो इन बदलावों को मार्च 2027 की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में लागू कर दिया जाएगा।
संभावित बदलाव क्या हैं?

सूत्र बताते हैं कि संघ प्रांत और क्षेत्र व्यवस्थाओं में सुधार करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में संघ के 45 प्रांत और 11 क्षेत्र हैं। नए प्रस्ताव के तहत 11 क्षेत्र को घटाकर 9 क्षेत्र किया जा सकता है। इस बदलाव के बाद, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक को एकीकृत किया जा सकता है। राजस्थान का क्षेत्र भी उत्तर क्षेत्र प्रचारक के तहत आ सकता है।
इसके अलावा, संघ राज्य प्रचारक की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हर राज्य में अब एक ही राज्य प्रचारक होगा, जो उस राज्य में संघ के कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों का नियोजन करेगा। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर संगठन को अधिक मजबूत बनाना और वरिष्ठ पदाधिकारियों तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच दूरी घटाना है।
नई संरचना में प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक नियुक्त किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र में इस बदलाव का उदाहरण लिया जाए तो विदर्भ में दो संभाग हैं — नागपुर और अमरावती। नई व्यवस्था के अनुसार संभाग की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जिससे संगठन के कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सके।
संगठनात्मक ढांचे में सुधार का मकसद
संघ के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाना है। एक राज्य प्रचारक द्वारा राज्य में संघ की गतिविधियों का समन्वय करने से फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और सामाजिक कार्यों पर ज्यादा जोर दिया जा सकेगा। हालांकि महानगर, संघ विभाग और जिला प्रचारक व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं होगा और ये पहले की तरह ही जारी रहेंगी। संघ के लिए यह महत्वपूर्ण है कि संगठन की मौजूदा ताकत और प्रभाव दोनों ही बनी रहें।










