Rajasthan की राजनीति और प्रशासन में नाम परिवर्तन को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने तीन शहरों के नाम बदलने की घोषणा की है, जिसमें प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन Mount Abu का नाम बदलना भी शामिल है। अब माउंट आबू को “आबू राज” के नाम से जाना जाएगा।
जयपुर: राजस्थान सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख शहरों के नाम बदलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाना है। इस फैसले के तहत राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू का नाम बदलकर ‘आबूराज’ किया जाएगा। इसी तरह, भीलवाड़ा जिले के ऐतिहासिक कस्बे जहाजपुर को अब ‘यज्ञपुर’ और डीग जिले के धार्मिक महत्व वाले शहर कामां को ‘कामवन’ के नाम से जाना जाएगा।
माउंट आबू लंबे समय से राजस्थान का प्रमुख पर्यटन स्थल रहा है और यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध है। वहीं जहाजपुर और कामां दोनों शहर अपनी प्राचीन विरासत और धार्मिक महत्व के कारण क्षेत्रीय पहचान रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में की घोषणा, जल्द जारी होगा आधिकारिक नोटिफिकेशन
राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान इन नाम परिवर्तनों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय स्थानीय जनता की भावनाओं, ऐतिहासिक तथ्यों और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार ने संकेत दिया है कि नाम परिवर्तन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी, जिसके बाद प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सरकार का मानना है कि नए नाम इन शहरों की पारंपरिक पहचान को वैश्विक स्तर पर बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करेंगे, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा मिल सकता है।

विपक्ष ने उठाए विकास से जुड़े सवाल, राजनीतिक बहस तेज
हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने नाम परिवर्तन के फैसले पर सीधे विरोध के बजाय विकास संबंधी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार को बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार और जल आपूर्ति जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाम परिवर्तन का यह निर्णय राज्य की सांस्कृतिक नीति और राजनीतिक विमर्श दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल, इस फैसले ने राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है, और अब आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।











