FY26 में सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय से निवेश मांग में तेजी आने की संभावना है। बुनियादी ढांचे, बिजली, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ेंगी और निजी निवेश को भी समर्थन मिलेगा।
New Delhi: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की गति तेज रहने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (Capex) में मजबूती है। एनएसओ का यह अनुमान संकेत देता है कि सरकारी निवेश से अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी और निजी निवेश को भी सहारा मिलेगा।
वित्त वर्ष 2026 में, सार्वजनिक क्षेत्र की पूंजीगत व्यय की वजह से निवेश मांग में तेजी देखी जा सकती है। इसके साथ ही, कम महंगाई दर और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर कम होने से खपत मांग भी मजबूत बनेगी।
निवेश और जीएफसीएफ का आंकड़ा
एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, सकल नियत पूंजी सृजन (Gross Fixed Capital Formation - GFCF) की हिस्सेदारी नॉमिनल हिसाब से वित्त वर्ष 2025 में 29.9 प्रतिशत थी। यह वित्त वर्ष 2026 में मामूली बढ़कर 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह आंकड़ा बुनियादी ढांचे में निवेश की स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
वास्तविक आधार पर निवेश मांग की वृद्धि की गति भी बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2025 में यह 7.1 प्रतिशत थी और वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 7.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह दर्शाता है कि सरकारी निवेश के चलते बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
निजी पूंजीगत व्यय का वर्तमान हाल
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर पारस जसराय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय के कारण निवेश मांग तेज बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान सालाना आधार पर 29.9 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है। हालांकि, व्यापक आधार वाला निजी पूंजीगत व्यय अभी शुरू नहीं हुआ है।
जसराय ने बताया कि निजी क्षेत्र में पूंजीगत व्यय की गति अभी सीमित है। इसके बावजूद, बिजली (ताप और अक्षय ऊर्जा), पारेषण और वितरण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और वाणिज्यिक व रिटेल रियल एस्टेट क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय की गतिविधियां बनी हुई हैं।
सरकारी सुधार और निवेश का सहारा
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का मानना है कि आगामी बजट में सरकार पूंजीगत व्यय को धीरे-धीरे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में सरकार ने घरेलू सुधारों और व्यावसायिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें विनियमन में ढील और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ाने वाले उपाय शामिल हैं।
जोशी के अनुसार, ये सरकारी सुधार निजी निवेश पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं। इससे निजी क्षेत्र में निवेश गतिविधियों की गति बढ़ने की संभावना है।
निजी खपत में मामूली सुधार
एनएसओ के अनुमान के मुताबिक, निजी अंतिम खपत व्यय (Private Final Consumption Expenditure - PFCE), जो घरेलू खपत का मुख्य संकेतक है, नॉमिनल हिसाब से वित्त वर्ष 2025 में 61.4 प्रतिशत था। यह वित्त वर्ष 2026 में 61.5 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, निजी व्यय की वृद्धि दर थोड़ी धीमी रहेगी। वित्त वर्ष 2026 में यह 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025 में 7.2 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि घरेलू खपत मजबूत बनी रहेगी, लेकिन वृद्धि की गति पहले की तुलना में थोड़ी कम होगी।
बुनियादी ढांचे और निवेश के प्रमुख क्षेत्र
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली उत्पादन, वितरण नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और वाणिज्यिक रियल एस्टेट में निवेश की गतिविधियां मुख्य रूप से निवेश मांग को बढ़ावा देंगी। सार्वजनिक क्षेत्र का पूंजीगत व्यय इन क्षेत्रों में तेजी लाने में सहायक रहेगा।
इसके अलावा, सरकारी निवेश से रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योगों में मांग और सामग्री की आपूर्ति में भी सुधार देखने को मिल सकता है। यह समग्र आर्थिक गतिविधियों को भी बल देगा और निजी निवेशकों को आकर्षित करेगा।











