SIR in Bengal: ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को सख्त पत्र, विशेष गहन संशोधन तुरंत रोकने की मांग

SIR in Bengal: ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को सख्त पत्र, विशेष गहन संशोधन तुरंत रोकने की मांग

पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision को लेकर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर प्रक्रिया तुरंत रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा SIR से लाखों योग्य मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है।

SIR in Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को 3 दिसंबर को एक विस्तृत पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। ममता बनर्जी का कहना है कि मौजूदा स्वरूप में SIR न केवल अव्यवस्थित है, बल्कि इससे लाखों योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा पैदा हो गया है।

यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में आने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊंचा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और चुनाव आयोग के बीच यह टकराव अब खुलकर सामने आ गया है, जिससे चुनावी निष्पक्षता और प्रशासनिक तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

SIR को बताया अनियोजित

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पत्र में SIR प्रक्रिया को “अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी वाला और तदर्थ” करार दिया है। उनका कहना है कि इस पूरी कवायद को बिना जमीनी हालात समझे और पर्याप्त संसाधन जुटाए जल्दबाजी में लागू किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें प्रक्रियागत उल्लंघन और प्रशासनिक चूक साफ दिखाई देती हैं। ममता बनर्जी के अनुसार, जिस उद्देश्य से यह संशोधन शुरू किया गया था, वह उद्देश्य ही अब खतरे में पड़ गया है, क्योंकि प्रक्रिया खुद अव्यवस्था का शिकार हो चुकी है।

लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला

ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संविधान की भावना से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन लोकतंत्र की रीढ़ होता है, लेकिन अगर यही प्रक्रिया खामियों से भरी हो, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार बन जाती है।

उनका स्पष्ट कहना है कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया चुनावी निष्पक्षता (electoral fairness) को कमजोर कर रही है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य पश्चिम बंगाल में यदि वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, तो इसका असर सीधे चुनाव परिणामों और जनता के विश्वास पर पड़ेगा।

लाखों मतदाताओं के अधिकार छिनने की चेतावनी

पत्र में ममता बनर्जी ने गंभीर चेतावनी दी है कि यदि SIR को बिना रोके आगे बढ़ाया गया, तो इसके परिणाम “अपरिवर्तनीय” होंगे। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

उनके अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटना केवल एक तकनीकी गलती नहीं होती, बल्कि यह नागरिक के मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के चलते लोकतांत्रिक शासन के मूल सिद्धांत कमजोर हो सकते हैं, जिसका असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

IT सिस्टम की खामियां और विरोधाभासी दिशानिर्देश

ममता बनर्जी ने SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे IT System पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी ढांचा दोषपूर्ण है और बार-बार सिस्टम फेल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

इसके साथ ही, उन्होंने विरोधाभासी दिशानिर्देशों का भी जिक्र किया, जिससे जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब दिशा-निर्देश ही स्पष्ट नहीं होंगे, तो प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रशिक्षित अधिकारियों की कमी से बढ़ी समस्या

अपने पत्र में ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि SIR से जुड़े कई अधिकारी और कर्मचारी पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें छोटी सी गलती भी बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती है।

उनका कहना है कि अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण सत्यापन प्रक्रिया में त्रुटियां बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति चुनाव आयोग की तैयारियों पर भी सवाल खड़े करती है।

BLA को बाहर रखने पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बूथ-स्तरीय एजेंटों (Booth Level Agents – BLA) को सुनवाई प्रक्रिया से बाहर रखने पर आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी के अनुसार, BLA की मौजूदगी से ही निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

उन्होंने लिखा कि जब सुनवाई के दौरान BLA को शामिल ही नहीं किया जाता, तो पूरी प्रक्रिया एकतरफा बन जाती है। इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है और चुनाव आयोग की निष्पक्ष छवि पर भी असर पड़ता है।

अवैध और मनमानी कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने की मांग

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि उसकी देखरेख में यदि कोई “अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई” होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी आयोग की होगी।

उन्होंने IT खामियों और असंगत निर्देशों को तुरंत ठीक करने की मांग की है। मुख्यमंत्री का कहना है कि जब तक इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक SIR को आगे बढ़ाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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