नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि Generative AI अब सोशल मीडिया पर गुमनाम अकाउंट्स की असली पहचान मिनटों में पता लगा सकता है। AI विभिन्न प्लेटफॉर्म से छोटी-छोटी जानकारियाँ जोड़कर किसी यूजर तक पहुँचता है। विशेषज्ञ इसे ऑनलाइन प्राइवेसी के लिए गंभीर खतरा मानते हैं और यूजर्स को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
Online Privacy Threats: आधुनिक Generative AI सोशल मीडिया पर गुमनाम रह रहे यूजर्स की पहचान मिनटों में उजागर कर सकता है। नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दिखाया कि AI अलग-अलग प्लेटफॉर्म से साझा की गई छोटी-छोटी जानकारी को जोड़कर किसी अकाउंट को वास्तविक व्यक्ति से जोड़ने में सक्षम है। यह खोज इंटरनेट पर निजी जानकारी साझा करने वाले लोगों के लिए गंभीर चेतावनी है, जिसे देखते हुए यूजर्स को सावधानी बरतनी चाहिए।
AI के जरिए सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान अब मिनटों में
नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि आधुनिक Generative AI अब सोशल मीडिया पर गुमनाम रहने वाले यूजर्स की असली पहचान खोजने में सक्षम हो गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, AI अलग-अलग प्लेटफॉर्म से छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर किसी व्यक्ति तक पहुंच सकता है, जिससे ऑनलाइन प्राइवेसी को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

AI कैसे खोजता है गुमनाम यूजर्स की पहचान
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रयोग किया। यूजर के पोस्ट में छोटे-छोटे संकेत जैसे स्कूल की जानकारी या कुत्ते के साथ पार्क का नाम शामिल थे। AI ने इन डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करके अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खोज की और अंततः अकाउंट को वास्तविक व्यक्ति से जोड़ने में सफलता हासिल की। इससे पता चलता है कि इंटरनेट पर साझा की गई सामान्य जानकारी भी पहचान उजागर करने में मदद कर सकती है।
AI मॉडल की शक्ति और खतरे
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले इस तरह की डिजिटल पहचान निकालने के लिए तकनीकी ज्ञान और संसाधनों की जरूरत होती थी। लेकिन बड़े भाषा मॉडल (LLM) की वजह से अब केवल इंटरनेट कनेक्शन और सार्वजनिक AI टूल्स से यह काम आसान और सस्ता हो गया है। इसका दुरुपयोग साइबर अपराधियों, गुमनाम एक्टिविस्ट की पहचान निकालने या ऑनलाइन फ्रॉड करने में हो सकता है।
ऑनलाइन प्राइवेसी बचाने के उपाय
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डेटा एक्सेस सीमित करना चाहिए और बॉट्स की पहचान करनी चाहिए जो बड़े पैमाने पर जानकारी स्क्रैप करते हैं। यूजर्स को भी निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। छोटी-छोटी जानकारियाँ जैसे लोकेशन, दैनिक गतिविधियां या व्यक्तिगत विवरण भी पहचान उजागर करने में मदद कर सकते हैं।













