1990 के दशक में बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियां आईं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती और प्रतिभा से दर्शकों के दिलों पर कब्जा जमाया। इन अभिनेत्रियों में से एक थीं उर्मिला मातोंडकर, जिन्हें कभी श्रीदेवी की ऑनस्क्रीन ‘सौतन’ कहा गया। उनकी फिल्में और किरदार दर्शकों के बीच लंबे समय तक यादगार बने।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: 90 के दशक में कई ऐसी अभिनेत्रियां आईं जिन्होंने पर्दे पर कदम रखते ही दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली, लेकिन वक्त के साथ कुछ सितारे इस तरह गुमनाम हो गए कि आज उन्हें पहचानना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक अभिनेत्री के बारे में हम आपको बता रहे हैं, जो कभी फिल्मों में श्रीदेवी की सौतन बनीं तो कभी देश के सबसे बड़े गैंगस्टर की माशूका के किरदार में नजर आईं।
90 के दशक की सबसे खूबसूरत अदाकाराओं में गिनी जाने वाली इस एक्ट्रेस ने अपने करियर में एक ऐसी बड़ी गलती कर दी, जिसकी वजह से वह माधुरी दीक्षित और काजोल की तरह समय के साथ ऑडियंस के लिए रिलेटेबल नहीं बन पाईं और धीरे-धीरे इंडस्ट्री से गायब हो गईं। कौन हैं ये हसीना और क्या रही उनकी जिंदगी की कहानी, आगे विस्तार से पढ़ें।
रंगीला ने दिया स्टारडम
उर्मिला मातोंडकर ने अपने करियर की शुरुआत बचपन से ही फिल्मों में की थी। 1991 में सनी देओल के अपोजिट फिल्म ‘नरसिम्हा’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। लेकिन उन्हें असली पहचान मिली राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘रंगीला’ (1995) से। इस फिल्म में उनके किरदार ने रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी और उर्मिला को एक नई पहचान दिलाई।
उर्मिला ने एक बातचीत में कहा, रंगीला के बाद मेरे लिए चीजें एक रात में बदल गईं। इस फिल्म के बाद मैं स्टार बन गई और मुझे पब्लिक का बहुत प्यार मिला। मुझे सबसे ज्यादा गर्व है कि मैंने अपने स्टारडम का इस्तेमाल अपनी फीस बढ़ाने के लिए जबरदस्ती नहीं किया। मैंने अलग-अलग किरदार निभाकर रिस्क लिया, जैसे पिंजरा, प्यार तूने क्या किया और जुदाई। रंगीला की वजह से ही मुझे वह तरह की फिल्में करने का अवसर मिला।

स्टारडम ही बना करियर के लिए चुनौती
‘रंगीला’ की सफलता के बाद न केवल उर्मिला बल्कि कई एक्ट्रेसेस की फीस में भी इजाफा हुआ। उर्मिला बताती हैं कि उन्होंने इस समय अपने किरदार पर फोकस किया, जबकि उनकी contemporaries कमर्शियल सिनेमा और फीस बढ़ाने पर ध्यान दे रही थीं। लेकिन, यही स्टारडम उनके करियर के लिए कभी-कभी चुनौती भी बन गया।
कहा जाता है कि राम गोपाल वर्मा ने ‘रंगीला’ के बाद उर्मिला में इतनी रुचि ली कि ऑफिस में भी उनकी फोटोज लगा दी गईं। जब यह बात रामू की पत्नी तक पहुंची, तो उन्होंने सेट पर उर्मिला को थप्पड़ मार दिया। इस घटना ने बॉलीवुड में हलचल मचाई और उर्मिला के करियर पर भी अप्रत्यक्ष असर डाला।
करियर ग्राफ और फिल्में
उर्मिला मातोंडकर ने ‘सत्या’, ‘जुदाई’, ‘जंगली’, ‘कंपनी’, ‘तेजाब’ जैसी कई हिट फिल्में कीं। उनकी एक्टिंग की तारीफ की गई, लेकिन 90 के दशक के बाद बॉलीवुड में बदलते दौर में वे खुद को पूरी तरह ढाल नहीं पाईं। धीरे-धीरे उनकी स्क्रीन उपस्थिति कम होती गई। उनकी अंतिम फुल-फ्लेज फिल्म EMI (2008) थी।
फैंस आज भी उन्हें ‘रंगीला गर्ल’ के रूप में याद करते हैं और उनके कई किरदार क्लासिक बन गए हैं। लेकिन इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिका रहना और माधुरी-काजोल जैसी contemporaries के बराबर लोकप्रियता बनाए रखना उनके लिए चुनौती बन गया।











