UPSC सिविल सेवा परीक्षा में कई बार उम्मीदवारों के कुल अंक समान होते हैं, लेकिन उनकी रैंक अलग होती है। ऐसे मामलों में आयोग तय नियमों के तहत मेन परीक्षा के प्रमुख पेपर और पर्सनैलिटी टेस्ट के अंक देखता है। जरूरत पड़ने पर उम्र के आधार पर भी अंतिम रैंक तय की जाती है।
UPSC Rank Rules: संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में जब दो या उससे अधिक उम्मीदवारों के कुल अंक समान होते हैं, तब आयोग तय प्रक्रिया के तहत उनकी अंतिम रैंक निर्धारित करता है। इसमें सबसे पहले मेन परीक्षा के प्रमुख पेपर जैसे निबंध और जनरल स्टडीज के साथ पर्सनैलिटी टेस्ट में प्राप्त अंकों की तुलना की जाती है। अगर इन चरणों में भी अंक बराबर हों, तो उम्र के आधार पर वरिष्ठ उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि समान अंक की स्थिति में भी पारदर्शी और स्पष्ट तरीके से रैंकिंग तय की जा सके, जो आगे चलकर उम्मीदवारों को मिलने वाली सेवाओं को प्रभावित करती है।
समान अंक होने पर ऐसे तय होती है UPSC रैंकिंग
UPSC सिविल सेवा परीक्षा में जब दो या उससे अधिक उम्मीदवारों के कुल अंक समान होते हैं, तो आयोग तय नियमों के आधार पर उनकी रैंकिंग निर्धारित करता है। इस स्थिति में सबसे पहले मुख्य परीक्षा के महत्वपूर्ण पेपरों के अंक देखे जाते हैं।
निबंध, जनरल स्टडीज पेपर 1, जनरल स्टडीज पेपर 2, जनरल स्टडीज पेपर 3 और जनरल स्टडीज पेपर 4 के साथ-साथ पर्सनैलिटी टेस्ट में किस उम्मीदवार ने अधिक अंक प्राप्त किए हैं, यह देखा जाता है। जिस उम्मीदवार के इन चरणों में ज्यादा अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है।

टाई की स्थिति में उम्र भी बनती है आधार
कई बार ऐसा भी होता है कि मुख्य परीक्षा के जरूरी पेपर और पर्सनैलिटी टेस्ट में भी दो उम्मीदवारों के अंक बराबर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आयोग दूसरा नियम लागू करता है, जिसे टाई-ब्रेकिंग नियम कहा जाता है।
इस नियम के तहत उम्र को आधार बनाया जाता है। यानी अगर अंक पूरी तरह समान हों, तो उम्र में वरिष्ठ उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती है और उसे बेहतर रैंक दी जाती है। इस तरह UPSC पारदर्शी तरीके से रैंकिंग तय करता है।
बेहतर रैंक ही तय करती है सर्विस
UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही अहम अच्छी रैंक हासिल करना भी होता है। दरअसल अंतिम रैंक के आधार पर ही यह तय होता है कि किसी उम्मीदवार को कौन-सी सेवा मिलेगी।
उच्च रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को आमतौर पर IAS, IPS और IFS जैसी प्रतिष्ठित सेवाएं चुनने का अवसर मिलता है। वहीं अपेक्षाकृत कम रैंक पाने वाले उम्मीदवारों को अन्य केंद्रीय सेवाओं में स्थान दिया जाता है।











