UPSC Success Story: पिता की मेहनत और बेटी के सपनों ने बनाई IAS तक की राह

UPSC Success Story: पिता की मेहनत और बेटी के सपनों ने बनाई IAS तक की राह

दीपेश कुमारी ने कठिन पारिवारिक हालात के बावजूद शिक्षा और मेहनत से अपने सपनों को साकार किया। शिशु आदर्श विद्या मंदिर से उच्च अंक हासिल करने के बाद IIT बॉम्बे से एमटेक किया और UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया 93वीं रैंक और EWS श्रेणी में चौथी रैंक प्राप्त की। उनकी कहानी मेहनत और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है।

UPSC Success Story: राजस्थान की दीपेश कुमारी ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद UPSC में ऑल इंडिया 93वीं रैंक और EWS श्रेणी में चौथी रैंक हासिल की। जोधपुर के MBM इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक और IIT बॉम्बे से एमटेक करने के बाद दीपेश ने अपने देश सेवा के सपने को साकार किया। उनके परिवार का समर्थन और लगातार मेहनत ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

बचपन से ही मेहनत और पढ़ाई का जज्बा

दीपेश कुमारी अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। घर की आर्थिक स्थिति कठिन थी, लेकिन उन्होंने पढ़ाई में पीछे नहीं हटने का निर्णय लिया। शिशु आदर्श विद्या मंदिर से उन्होंने 10वीं में 98 प्रतिशत और 12वीं में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

इन उपलब्धियों ने साबित किया कि कठिन हालात में भी अगर मन मजबूत हो तो आगे बढ़ा जा सकता है। दीपेश की मेहनत और अनुशासन ने परिवार को गर्वित किया और आगे की राह आसान बनाई।

इंजीनियरिंग से IIT तक का सफर

दीपेश ने जोधपुर के MBM इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और इसके बाद IIT बॉम्बे से एमटेक की। यह उनके पिता के लिए गर्व का पल था, जिसने अपनी कमाई से बेटी को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचते देखा।

एमटेक के बाद दीपेश ने प्राइवेट सेक्टर में नौकरी भी की। नौकरी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को स्थिर किया, लेकिन दीपेश का सपना देश सेवा का था, जिसके लिए उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की।

UPSC की चुनौती और सफलता

साल 2020 में पहली कोशिश में सफलता नहीं मिलने के बावजूद दीपेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने तैयारी और रणनीति को और मजबूत किया। परिवार के सहयोग और खुद के संकल्प के बल पर 2021 में दूसरी बार प्रयास किया और UPSC में ऑल इंडिया 93वीं रैंक और EWS श्रेणी में चौथी रैंक हासिल की।

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