US टैरिफ के 100 दिन! भारत का निर्यात लड़खड़ाया, MSME सेक्टर पर बड़ा असर

US टैरिफ के 100 दिन! भारत का निर्यात लड़खड़ाया, MSME सेक्टर पर बड़ा असर

अमेरिका के बढ़े टैरिफ ने भारतीय निर्यात को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। निर्यात 8.8 अरब डॉलर से गिरकर 6.3 अरब डॉलर रह गया, व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और MSME सेक्टर दबाव में आया। भारत नए बाजारों की ओर मुड़ा है।

US Tariff: अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डाला है। निर्यात में तेजी से गिरावट, सोने के आयात में रिकॉर्ड उछाल और अमेरिकी बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा ने भारत के व्यापार समीकरण को कमजोर किया है। Brickwork Ratings की रिपोर्ट ‘From disruption to diversification: India’s path through 100 days of tariff shocks’ के अनुसार, टैरिफ के 100 दिनों में भारतीय निर्यात, रोजगार और उद्योगों पर भारी दबाव देखा गया। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने स्थिति संभालने के लिए तुरंत अपनी रणनीति बदली और नए बाजारों की ओर रुख किया।

US को निर्यात 6.3 अरब डॉलर तक गिरा

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे तेज गिरावट अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात में दर्ज हुई। मई 2025 में जहां निर्यात 8.8 अरब डॉलर था, वहीं अक्टूबर 2025 में यह घटकर 6.3 अरब डॉलर रह गया। खास बात यह है कि टैरिफ फ्री प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा गिरावट दिखी। 50% टैरिफ वाले उत्पादों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा।

स्मार्टफोन निर्यात मई से सितंबर के बीच 60% से अधिक गिर गया। फार्मास्यूटिकल्स में भी करीब 120 मिलियन डॉलर की कमी आई। जेम्स एंड ज्वैलरी, टेक्सटाइल, सोलर पैनल, केमिकल्स और समुद्री उत्पाद जैसे सेक्टर्स पर भारी असर हुआ। मई 2025 में इनका निर्यात 4.8 अरब डॉलर था जो सितंबर 2025 में घटकर 3.2 अरब डॉलर पर आ गया।

Brickwork का अनुमान है कि 50% US टैरिफ से भारत की GDP ग्रोथ लगभग 0.5% तक कम हो सकती है।

व्यापार घाटा ऐतिहासिक स्तर पर

रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत का Trade Deficit 41.7 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया। इसमें सबसे बड़ा योगदान सोने के आयात का रहा जो तीन गुना बढ़कर 14.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

हालांकि, सेवा क्षेत्र ने मजबूती दिखाई। अक्टूबर 2025 में सेवाओं का निर्यात सालाना आधार पर 12% बढ़कर 38.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

भारत ने बदली निर्यात स्ट्रैटेजी

US मार्केट में गिरावट की भरपाई करने के लिए भारत ने तुरंत निर्यात डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान दिया। निर्यात UAE, फ्रांस, जापान, चीन, वियतनाम और थाईलैंड की ओर बढ़ाया गया। इसका परिणाम यह रहा कि सितंबर 2025 में कुल माल निर्यात 6.7% बढ़ा, भले ही US टैरिफ का दबाव जारी रहा।

लेकिन MSME सेक्टर पर इसका गहरा असर पड़ा। निर्यात आधारित उत्पादन कम होने से रोजगार में नुकसान और निवेश में गिरावट दर्ज हुई।

सरकार ने MSME सेक्टर को समर्थन देने, Export Finance आसान करने और Product Diversification को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं। भारत-UK FTA, इंडिया-EFTA समझौते और अमेरिका के साथ Trade Talks को भी तेज किया गया है। भारत का लक्ष्य 2025 के अंत तक US के साथ व्यापक द्विपक्षीय Trade Agreement करना है जिसमें टैरिफ रियायतें और संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि, मत्स्य व MSME की सुरक्षा शामिल होगी।

भविष्य के लिए मजबूत मॉडल

Brickwork का कहना है कि भारत की यह Diversification Strategy सिर्फ मौजूदा संकट का जवाब नहीं है बल्कि एक तेज, स्थिर और सस्टेनेबल Export Model की दिशा में बड़ा कदम है।

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