वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से नाराज संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय कानून का दिया हवाला

वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से नाराज संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय कानून का दिया हवाला

संयुक्त राष्ट्र ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। UN ने कहा कि ताकत के बल पर किसी देश का भविष्य तय नहीं किया जा सकता। यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, UN Charter और संप्रभुता का उल्लंघन है।

World News: वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने खुलकर नाराजगी जताई है। संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि ताकत के बल पर किसी देश की राजनीति या भविष्य तय नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून (international law), संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) और किसी देश की संप्रभुता (sovereignty) का सीधा उल्लंघन है। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या बड़ी ताकतें अंतरराष्ट्रीय नियमों से ऊपर खुद को मानने लगी हैं।

अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन पर UN की सीधी टिप्पणी

संयुक्त राष्ट्र ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल से अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य दखलअंदाजी न केवल उस देश की संप्रभुता पर हमला है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।

UN के अनुसार, जब कोई देश अपनी ताकत के दम पर दूसरे देश में हस्तक्षेप करता है, तो इससे पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर होती है। यह संदेश बेहद साफ था कि संयुक्त राष्ट्र इस तरह की कार्रवाइयों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करता।

संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

संयुक्त राष्ट्र के बयान में इस बात पर खास जोर दिया गया कि वेनेजुएला में हुआ अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। चार्टर के अनुसार, किसी भी देश को दूसरे देश की सीमाओं, सरकार या राजनीतिक व्यवस्था में बल प्रयोग के जरिए हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। UN ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय कानून की नींव हिलती है और दुनिया को और ज्यादा असुरक्षित बना देती है।

बल प्रयोग से राजनीति नहीं चल सकती

संयुक्त राष्ट्र ने अपने संदेश में यह भी कहा कि राजनीति बंदूक के दम पर नहीं चलाई जा सकती। ताकत का इस्तेमाल कर किसी देश पर अपनी शर्तें थोपना वैश्विक शांति के लिए खतरनाक है। UN का मानना है कि अगर इस तरह की प्रवृत्ति को रोका नहीं गया, तो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय विवाद और हिंसक हो सकते हैं। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की उस नीति पर सवाल उठाता है, जिसमें सैन्य शक्ति को कूटनीति (diplomacy) से ऊपर रखा जा रहा है।

क्षेत्रीय और सियासी दावों के लिए फोर्स पर रोक

संयुक्त राष्ट्र की ओर से शेयर की गई जानकारी में यह भी साफ किया गया कि किसी भी देश को अपने क्षेत्रीय दावों या राजनीतिक मांगों को पूरा करने के लिए फोर्स (force) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। UN ने चेतावनी दी कि अगर देशों ने इस सिद्धांत को नजरअंदाज किया, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अराजकता की ओर बढ़ सकती है। यह संदेश केवल वेनेजुएला या अमेरिका तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

वेनेजुएला के भविष्य पर फैसला जनता का अधिकार

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी स्पष्ट किया कि वेनेजुएला के भविष्य का फैसला वहां के लोगों को ही करना चाहिए। किसी बाहरी ताकत को यह हक नहीं है कि वह सैन्य दबाव बनाकर सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक फैसले थोपे। UN का मानना है कि लोकतंत्र (democracy) का असली मतलब यही है कि जनता अपने देश की दिशा खुद तय करे, न कि विदेशी हस्तक्षेप के जरिए।

ह्यूमन राइट्स हाई कमिश्नर का बयान

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के हाई कमिश्नर Volker Türk ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। उनके मुताबिक, किसी भी देश को अपनी राजनीतिक या क्षेत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए ताकत का सहारा नहीं लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला के समाज को इस समय इलाज और स्थिरता की जरूरत है, न कि बाहरी सैन्य दबाव की।

मानवाधिकार और स्थिरता का सवाल

Volker Türk ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि सैन्य कार्रवाई से मानवाधिकारों (human rights) का गंभीर हनन होता है। ऐसे हालात में आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला को हिंसा और डर के माहौल से निकालने के लिए राजनीतिक संवाद और शांतिपूर्ण समाधान जरूरी है। बाहरी हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ सकते हैं।

मादुरो को जबरन अमेरिका ले जाने का दावा

इस पूरे विवाद की जड़ 3 जनवरी को हुई अमेरिकी कार्रवाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़कर जबरन अमेरिका ले गई। इस कार्रवाई के बाद से ही दुनिया भर में अमेरिका की आलोचना हो रही है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे खतरनाक मिसाल बताया है।

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