WFI चुनाव विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवानों की याचिका की खारिज, बजरंग और विनेश को लगा बड़ा झटका

WFI चुनाव विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवानों की याचिका की खारिज, बजरंग और विनेश को लगा बड़ा झटका

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के हालिया चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने शीर्ष पहलवानों बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और सत्यवर्त कादियान की याचिका को खारिज कर दिया।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शीर्ष पहलवानों बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और सत्यवर्त कादियान को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने इन पहलवानों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के चुनाव को चुनौती दे रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये पहलवान कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिसके कारण दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करने का फैसला लिया।

पहलवानों की याचिका और चुनाव विवाद

इस मामले में पहलवानों ने कोर्ट में दलील दी थी कि डब्ल्यूएफआई के चुनाव में प्रशासनिक और प्रक्रियागत खामियां रहीं, जिससे खेल संघ की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि चुनाव में सही प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता नहीं रही। विशेष रूप से, चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे उम्मीदवार संजय सिंह और अनीता श्योराण के बीच मुकाबले को प्रभावित करने वाले तथाकथित दोषों को उजागर किया गया।

संजय सिंह ने अनीता श्योराण को हराकर अध्यक्ष पद जीत हासिल किया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि अनीता को समर्थन देने के बावजूद चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति पर सख्त टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और सत्यवर्त कादियान पिछली दो सुनवाइयों में भी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि, लगता है कि इस मामले को आगे ले जाने में याचिकाकर्ताओं की कोई रुचि नहीं है।

इस कारण, अदालत ने याचिका को रद्द कर दिया और WFI चुनावों की वैधता को मान्यता दी। अदालत के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ताओं का बार-बार सुनवाई में उपस्थित न होना ही मुख्य कारण रहा। पहलवानों की अनुपस्थिति ने यह संकेत दिया कि वे मामले को आगे नहीं ले जाना चाहते या उनकी याचिका की गंभीरता पर सवाल उठता है।

इस घटना ने भारतीय कुश्ती और खेल प्रशासन में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस को नया मोड़ दिया है। पहलवानों ने आरोप लगाए थे कि चुनाव सही माहौल और निष्पक्ष तरीके से नहीं आयोजित हुए थे, लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त ठहराया नहीं और याचिका खारिज कर दी।

 

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