आशीष सूद का विपक्ष पर पलटवार, AQI मीटर के पुराने डेटा को लेकर दी सफाई

आशीष सूद का विपक्ष पर पलटवार, AQI मीटर के पुराने डेटा को लेकर दी सफाई

दिल्ली के AQI मीटर और प्रदूषण आंकड़ों को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाए। गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप हैं। उन्होंने डेटा सुधार और नए मॉनिटरिंग स्टेशनों के बारे में जानकारी दी।

New Delhi: दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली का प्रदूषण कोई नया मुद्दा नहीं है और न ही यह सिर्फ मौजूदा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ है। दिल्ली का हवा साफ रखना एक चुनौतीपूर्ण मामला है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषण के कारण होता है।

विपक्ष पर पलटवार

गृह मंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ नेता निराधार आरोप लगा रहे हैं कि दिल्ली सरकार हरे-भरे इलाकों में AQI (Air Quality Index) मीटर लगाकर प्रदूषण के आंकड़ों को कम दिखा रही है। आशीष सूद ने इसे पूरी तरह गलत बताया और कहा कि यह आरोप केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय में भी हवा की गुणवत्ता पर ध्यान देने के बजाय आंकड़ों को सही दिखाने की कोशिश की गई थी।

पुराने AQI मीटर और उनकी स्थिति

आशीष सूद ने बताया कि 2017-18 में 20 नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए थे। इनमें जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, असोला वन्यजीव अभयारण्य, अलीपुर के ग्रामीण क्षेत्र, नेहरू नगर का कॉलेज कैंपस और नजफगढ़ जैसे हरे-भरे इलाके शामिल थे। इनमें से करीब 30% स्टेशन हरी पट्टियों या कम आबादी वाले क्षेत्रों में लगाए गए थे। उनका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता को बेहतर तरीके से मापना और सभी क्षेत्रों का औसत प्रदूषण स्तर जानना था।

सीएजी रिपोर्ट में आई चौंकाने वाली जानकारी

हालांकि, कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की जगहें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नियमों पर पूरी तरह से खरी नहीं उतरतीं। इससे डेटा में गड़बड़ी आ सकती है और AQI के आंकड़े अविश्वसनीय हो सकते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि पुराने समय में सरकार ने हवा साफ करने की बजाय आंकड़ों को नियंत्रित करने की कोशिश की, जो जनता के लिए सही संदेश नहीं है।

प्रदूषण का मुख्य कारण पड़ोसी राज्यों से आने वाला धुआं

आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण आसपास के राज्यों से आने वाला धुआं है। उत्तर भारत में ठंडी हवा और पराली जलाने की परंपरा के कारण राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसके अलावा, निर्माण कार्य, वाहनों की संख्या और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रदूषण में योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि मौसम पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और हवा की दिशा बदलना या धुएं को रोकना सरकार के अधिकार में नहीं है।

जनता के लिए संदेश

गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि प्रदूषण को कम करने के उपाय किए जाएं। उन्होंने कहा कि लोगों को चाहिए कि वे निजी वाहनों का कम उपयोग करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाएं और प्रदूषण कम करने में सहयोग दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि हवा की गुणवत्ता पर नजर रखना और सही आंकड़े दिखाना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ ठोस कदम उठाना और प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना जरूरी है।

डेटा की विश्वसनीयता

आशीष सूद ने कहा कि AQI मीटर का सही स्थान चुनना और डेटा को विश्वसनीय बनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में नए स्थानों पर अधिक प्रभावी और केंद्रीय मानकों के अनुसार मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। इससे राजधानी में प्रदूषण के वास्तविक आंकड़े जनता और नीति निर्माताओं तक पहुंच सकेंगे और उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

विपक्ष के आरोपों पर टिप्पणी

गृह मंत्री ने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता हर मुद्दे पर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। कभी वे बिजली, कभी कोयला, कभी ईवीएम और कभी न्यूक्लियर पावर के विशेषज्ञ बन जाते हैं। इसी तरह अब वे प्रदूषण के आंकड़ों को लेकर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का काम आंकड़ों को छुपाना नहीं बल्कि प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

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