US-Israel की संयुक्त कार्रवाई से ईरान में बड़ा भूचाल, खामेनेई नहीं रहे, कच्चे तेल के दाम आसमान छूने की आशंका

US-Israel की संयुक्त कार्रवाई से ईरान में बड़ा भूचाल, खामेनेई नहीं रहे, कच्चे तेल के दाम आसमान छूने की आशंका

US-Israel हमलों और अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद Middle East में तनाव बढ़ गया है। Strait of Hormuz पर संभावित रुकावट से Crude Oil की कीमतों में तेज उछाल की आशंका है, जिससे वैश्विक बाजार चिंतित हैं।

Business News: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद Middle East में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरानी मीडिया ने पुष्टि की है कि इन हमलों में देश के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई है। इस घटना ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ आर्थिक बाजारों को भी झकझोर दिया है।

सबसे बड़ी चिंता अब तेल की कीमतों को लेकर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह की शुरुआत के साथ ही Crude Oil Price में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक, सरकारें और आम उपभोक्ता सभी इस समय हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

खामेनेई की मौत के बाद बढ़ी अनिश्चितता

खामेनेई की मौत की खबर ने ईरान की सत्ता संरचना और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। युद्ध के हालात में नेतृत्व परिवर्तन हमेशा बड़ा संकेत माना जाता है। ऐसे समय में किसी भी तरह की सैन्य प्रतिक्रिया या राजनीतिक कदम तेल बाजार पर सीधा असर डाल सकता है।

ईरान OPEC देशों में एक अहम तेल उत्पादक है। ऐसे में वहां की अस्थिरता का मतलब है सप्लाई चेन पर दबाव। यही कारण है कि वैश्विक बाजारों में पहले से ही हलचल तेज हो गई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा केंद्र

इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील बिंदु Strait of Hormuz है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है। वैश्विक खपत का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों के बीच यह रिपोर्ट सामने आई कि इस मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ा है। अगर यहां लंबे समय तक रुकावट रहती है, तो सप्लाई घट सकती है और कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

यह जलडमरूमध्य खाड़ी के बड़े उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से निकलने वाले तेल को एशियाई बाजारों तक पहुंचाता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश इस रूट पर निर्भर हैं।

युद्ध से पहले ही चढ़ने लगे थे दाम

युद्ध की आशंकाओं के चलते तेल की कीमतें पहले ही बढ़ने लगी थीं। इंटरनेशनल बेंचमार्क Brent Crude शुक्रवार को 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो पिछले सात महीनों का उच्च स्तर था।

ईरान रोजाना लगभग 1.6 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट करता है। इसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। अगर किसी वजह से यह सप्लाई रुकती है, तो चीन को दूसरे स्रोतों से तेल खरीदना होगा। इससे ग्लोबल डिमांड और सप्लाई का संतुलन बिगड़ सकता है और कीमतों में और तेजी आ सकती है।

क्या 90 डॉलर के पार जाएगा Crude Oil

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के विश्लेषक क्लेटन सीगल के मुताबिक अगर ईरान टैंकर ट्रैफिक में गंभीर रुकावट डालता है, तो Crude Oil की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है।

अब जबकि युद्ध तेज हो गया है और खामेनेई की मौत की पुष्टि हो चुकी है, बाजार में घबराहट और बढ़ सकती है। निवेशकों को डर है कि हालात अगर और बिगड़े, तो तेल की कीमतों में बंपर उछाल देखने को मिल सकता है।

अमेरिका में गैस की कीमतों पर असर

तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ता है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका में गैस की कीमतें 3 डॉलर प्रति गैलन से काफी ऊपर जा सकती हैं।

US मोटरिंग क्लब AAA के मुताबिक पिछले हफ्ते औसतन गैस की कीमत 2.98 डॉलर प्रति गैलन थी। अगर Crude Oil महंगा होता है, तो यह औसत तेजी से ऊपर जा सकता है। इसका असर आम अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं।

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