अदाणी ग्रुप ने SEC समन स्वीकार करने का किया ऐलान, 14 महीने बाद बड़ा मोड़

अदाणी ग्रुप ने SEC समन स्वीकार करने का किया ऐलान, 14 महीने बाद बड़ा मोड़

अदाणी ग्रुप और उनके भतीजे अब अमेरिकी SEC के समन को स्वीकार करने के लिए बातचीत को तैयार हैं। 14 महीने बाद यह पहला कदम है, जिससे अमेरिकी अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

Business: अदाणी ग्रुप से जुड़े अमेरिकी SEC केस में 14 महीने बाद बड़ा मोड़ सामने आया है। गौतम अदाणी तथा उनके भतीजे सागर अदाणी अब अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी SEC के समन को स्वीकार करने के लिए बातचीत को तैयार नजर आ रहे हैं। यह पहला मौका है जब इस मामले में अदाणी पक्ष ने अमेरिकी अदालत में औपचारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस घटनाक्रम को निवेशक, कारोबारी जगत तथा कानूनी विशेषज्ञ काफी अहम मान रहे हैं।

14 महीने बाद अदालत में नई पहल

अब तक इस केस में सबसे बड़ा अड़चन समन की सर्विस यानी कानूनी नोटिस पहुंचाने को लेकर थी। अमेरिकी SEC पिछले 14 महीनों से गौतम अदाणी तथा सागर अदाणी को समन भेजने की कोशिश कर रहा था, लेकिन भारतीय कानून मंत्रालय ने इसे हैग कन्वेंशन के तहत दो बार लौटा दिया था। अब अदाणी पक्ष की ओर से यह संकेत मिला है कि वे इस प्रक्रिया पर सीधे SEC के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिससे मामला आगे बढ़ सके।

न्यूयॉर्क फेडरल कोर्ट में क्या हुआ

23 जनवरी को न्यूयॉर्क की फेडरल अदालत में सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP लॉ फर्म ने गौतम अदाणी तथा सागर अदाणी की तरफ से जज निकोलस जी गारौफिस को एक पत्र सौंपा। इस पत्र में बताया गया कि दोनों पक्ष समन की सर्विस को लेकर किसी आपसी समाधान पर चर्चा कर रहे हैं। इसी वजह से अदालत से अनुरोध किया गया कि फिलहाल इस विषय में कोई आदेश न दिया जाए।

पत्र में बातचीत की शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन यह साफ संकेत था कि अदाणी पक्ष अब इस कानूनी प्रक्रिया से पूरी तरह बचने के बजाय बातचीत के रास्ते आगे बढ़ना चाहता है।

SEC का ईमेल के जरिए समन देने का आग्रह

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी SEC ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह भारतीय सरकार को बायपास करते हुए समन सीधे ईमेल के जरिए भेजने की अनुमति दे। SEC का कहना था कि भारत के कानून मंत्रालय ने हैग कन्वेंशन के तहत समन स्वीकार करने से दो बार इनकार कर दिया है, इसलिए अब उनके पास कोई प्रभावी विकल्प नहीं बचा है।

SEC ने यह भी कहा कि समन अदाणी के अमेरिकी वकीलों के माध्यम से दिया जा सकता है, ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

कानून मंत्रालय की पहली आपत्ति

भारतीय कानून मंत्रालय ने पहली बार मई में समन यह कहकर लौटा दिया था कि SEC के कवर लेटर पर स्याही से हस्ताक्षर नहीं थे तथा स्टैंडर्ड फॉर्म पर आधिकारिक मुहर भी नहीं लगी थी। मंत्रालय के मुताबिक यह प्रक्रिया हैग कन्वेंशन की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी।

हालांकि SEC ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि हैग कन्वेंशन में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है और यह तकनीकी आधार पर समन लौटाना उचित नहीं है।

दूसरी बार भी समन लौटा

इसके बाद 27 मई को SEC ने दोबारा समन भेजा, लेकिन दिसंबर में कानून मंत्रालय ने फिर से इसे लौटा दिया। इस बार मंत्रालय ने SEC के आंतरिक नियम 5(b) का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला उन श्रेणियों में नहीं आता, जिन्हें मंत्रालय संभालता है।

नवंबर 2025 की तारीख वाली इन चिट्ठियों पर डिप्टी लीगल एडवाइजर कृष्ण मोहन आर्य तथा सेक्शन ऑफिसर निरंजन प्रसाद के हस्ताक्षर थे। इस फैसले के बाद मामला और ज्यादा जटिल हो गया।

SEC का मंत्रालय पर कड़ा रुख

SEC ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में भारतीय कानून मंत्रालय के इस रुख को पूरी तरह खारिज कर दिया। SEC का कहना है कि मंत्रालय की आपत्तियां हैग कन्वेंशन के नियमों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर SEC की जांच तथा कानूनी कार्रवाई की वैधता को चुनौती देने जैसा है।

SEC ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के तहत उनके पास समन देने का कोई वैकल्पिक तरीका नहीं बचा है, जिससे यह प्रक्रिया अटक गई है।

सरकारी प्रतिक्रिया पर चुप्पी

नई दिल्ली में कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं SEC के प्रवक्ता ने भी यही कहा कि वे अपनी सार्वजनिक फाइलिंग्स से आगे कुछ नहीं कहेंगे।

दूसरी तरफ, अदाणी ग्रुप की ओर से प्रतिनिधित्व कर रही सुलिवन एंड क्रॉमवेल लॉ फर्म ने भी फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार किया है और बाद में संपर्क करने की बात कही है।

SEC के धोखाधड़ी आरोप

अमेरिकी SEC ने 20 नवंबर 2024 को गौतम अदाणी तथा सागर अदाणी के खिलाफ सिविल फ्रॉड यानी धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। SEC का दावा है कि 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड इश्यू में निवेशकों को गुमराह किया गया और इसके जरिए अमेरिकी निवेशकों से करीब 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए गए।

SEC का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में जरूरी जानकारी छुपाई गई, जिससे निवेशकों को गलत निर्णय लेने पड़े।

अदाणी ग्रुप का जवाब

अदाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को सिरे से बेबुनियाद बताया है। कंपनी का कहना है कि वह सभी कानूनों का पालन करती है और यह मामला तथ्यों से ज्यादा आरोपों पर आधारित है। ग्रुप ने यह भी कहा है कि वह कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा और अपनी स्थिति मजबूती से रखेगा।

शेयर बाजार पर दिखा असर

SEC के इस मोशन और अदालत में चल रही गतिविधियों की खबर सामने आते ही शुक्रवार को अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। कुछ शेयरों में 3.4 प्रतिशत से लेकर 14.54 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे निवेशकों की चिंता भी बढ़ी है।

Leave a comment