अमेरिका की रणनीति में ईरान प्रमुख निशाने पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार सत्ता संकट की आशंका के बीच अयातुल्ला अली खामनेई ने आपात स्थिति में देश छोड़ने के लिए Plan B तैयार कर लिया है।
World News: वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर अमेरिका का बढ़ता नियंत्रण केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसका सीधा संकेत ईरान में संभावित सत्ता बदलाव (regime change) की ओर इशारा करता है। अमेरिका जानता है कि अगर भविष्य में ईरान में किसी तरह का सैन्य या राजनीतिक दखल होता है, तो पश्चिम एशिया में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
ऐसे हालात में वेनेजुएला जैसे देश के तेल संसाधनों पर पकड़ अमेरिका के लिए एक रणनीतिक सुरक्षा कवच बन सकती है। यही वजह है कि विश्लेषक इसे ईरान को लेकर अमेरिका की लंबी तैयारी का हिस्सा मान रहे हैं।
ट्रंप का शांति संदेश
डोनाल्ड ट्रंप भले ही खुद को शांति का दूत बताते रहे हों, लेकिन हालिया अमेरिकी कदमों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका आज भी उतना ही ताकतवर है, जितना वह शीत युद्ध (Cold War) के दौर में हुआ करता था। वेनेजुएला पर प्रभाव बढ़ाना और ईरान पर लगातार दबाव बनाना इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन पीछे हटने के मूड में नहीं है। जानकार मानते हैं कि ईरान पर सीधा हमला या अंदरूनी हस्तक्षेप अब केवल समय की बात रह गया है। इसके बाद वैश्विक शक्ति संतुलन यानी World Order में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
ईरान की सख्त भाषा और बढ़ता खतरा
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से कहा है कि ईरान किसी भी दुश्मन के सामने नहीं झुकेगा और अपने विरोधियों को घुटने टेकने पर मजबूर करेगा। लेकिन इसी सख्त बयानबाजी के बीच यह खबर सामने आई है कि खामनेई ने देश छोड़ने की एक आकस्मिक योजना यानी Plan B तैयार कर ली है। यह योजना उस स्थिति के लिए बनाई गई है, जब देश में हालात उनके नियंत्रण से बाहर हो जाएं।
खामनेई का Plan B और संभावित पलायन
ब्रिटिश अखबार द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज होते हैं और सुरक्षा बल उन्हें काबू में रखने में विफल रहते हैं, तो 86 वर्षीय खामनेई तेहरान छोड़ सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सेना या सुरक्षा एजेंसियां उनके आदेश मानने से इनकार करती हैं या पाला बदल लेती हैं, तो खामनेई अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के साथ देश से बाहर जाने के लिए तैयार हैं। इस संभावित पलायन में करीब 20 लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें उनके बेटे मोजतबा खामनेई भी हैं, जिन्हें उनका उत्तराधिकारी माना जाता है।
असद मॉडल से प्रेरित रणनीति
खामनेई की यह रणनीति पूर्व सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के उदाहरण से प्रभावित मानी जा रही है। दिसंबर 2024 में जब सीरिया में विपक्षी बलों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया था, तब असद अपने परिवार के साथ रूस की राजधानी मॉस्को भाग गए थे। द टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, खामनेई की टीम ने भी पहले से निकास मार्गों (exit routes) की पूरी योजना बना ली है। हालात बिगड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए विदेशी संपत्तियों, नकदी भंडार और लॉजिस्टिक सपोर्ट की तैयारी की जा चुकी है।
कहां हो सकता है खामनेई का सुरक्षित ठिकाना
सबसे बड़ा सवाल यही है कि खामनेई अगर ईरान छोड़ते हैं तो वे कहां शरण लेंगे। जानकारों का मानना है कि रूस एक मजबूत विकल्प हो सकता है, क्योंकि मॉस्को पहले भी असद जैसे सहयोगियों को पनाह दे चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य मित्र देश भी विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं, जहां अमेरिका के लिए सीधा सैन्य हमला करना लगभग असंभव होगा। यही वजह है कि इस ठिकाने को ऐसा माना जा रहा है, जहां अमेरिका सपने में भी हमले की सोच नहीं सकता।
सेटाड और खामनेई का विशाल आर्थिक नेटवर्क
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि खामनेई एक विशाल वित्तीय नेटवर्क को नियंत्रित करते हैं, जिसका बड़ा हिस्सा सेटाड (Setad) के जरिए संचालित होता है। सेटाड एक अर्ध-सरकारी समूह है, जो अपारदर्शी वित्तीय ढांचे और धर्मार्थ संस्थानों से जुड़ा हुआ है। साल 2013 में रॉयटर्स की एक जांच में दावा किया गया था कि कंपनियों और अचल संपत्तियों सहित खामनेई के नियंत्रण में मौजूद संपत्तियों की कुल कीमत करीब 95 अरब डॉलर है। यही आर्थिक ताकत उन्हें किसी भी आपात स्थिति में देश छोड़ने की क्षमता देती है।
इजरायल युद्ध के बाद बिगड़ा स्वास्थ्य
खुफिया आकलनों में यह भी सामने आया है कि पिछले साल इजरायल के साथ हुए लगभग 12 दिनों के युद्ध के बाद से खामनेई की मानसिक और शारीरिक स्थिति कमजोर हुई है। इस युद्ध के दौरान कई वरिष्ठ IRGC कमांडर इजरायली हमलों में मारे गए थे। बताया गया है कि उस समय खामनेई ने खुद को एक बंकर में सुरक्षित रखा था। युद्ध के बाद से उनकी सार्वजनिक मौजूदगी काफी कम हो गई है और हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।











