डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति के बाद अमेरिका के वेनेजुएला मिशन ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। ईरान समेत 5 देशों पर संभावित कार्रवाई के संकेत दिए जा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
America: अमेरिका की विदेश नीति में जिस तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अब पहले से ज्यादा आक्रामक और स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ता नजर आ रहा है। यह बदलाव सिर्फ कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे सैन्य और रणनीतिक कार्रवाइयों में भी दिखाई दे रहा है।
वेनेजुएला में हुई हालिया घटना के बाद यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या अमेरिका यहीं रुकने वाला है या फिर आने वाले समय में कुछ और देशों पर भी उसकी कार्रवाई देखने को मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
वेनेजुएला घटना ने बदली वैश्विक तस्वीर
अमेरिका से महज 25 किलोमीटर दूर वेनेजुएला में जिस तरह अमेरिकी एजेंसियों ने कार्रवाई की, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने बेहद कम समय में वेनेजुएला में घुसपैठ की और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया।
कहा जा रहा है कि अगर कुछ ही मिनट और मिल जाते, तो मादुरो को सीधे अमेरिका ले जाया जा सकता था। इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका अब किसी भी देश की संप्रभुता को लेकर पहले जैसी झिझक नहीं दिखा रहा है, खासकर तब जब उसे अपने राष्ट्रीय हित खतरे में नजर आते हैं।
क्या वेनेजुएला के बाद अगला निशाना तय
वेनेजुएला के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका का अगला टारगेट कौन सा देश हो सकता है। अमेरिका के घरेलू संकेत और अंतरराष्ट्रीय बयान यह इशारा कर रहे हैं कि कुछ देशों को लेकर वॉशिंगटन पहले से ही रणनीति बना चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका उन देशों पर फोकस कर रहा है, जिनके साथ उसके लंबे समय से वैचारिक मतभेद रहे हैं या जो उसके प्रभाव क्षेत्र को चुनौती दे रहे हैं। इस सूची में कई ऐसे देश हैं, जो अमेरिका की विदेश नीति के लिए हमेशा से संवेदनशील रहे हैं।
ईरान बना सबसे बड़ा संभावित लक्ष्य
अमेरिका की संभावित कार्रवाई की सूची में सबसे ऊपर नाम ईरान का सामने आ रहा है। ट्रंप प्रशासन पहले भी कई बार ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपना चुका है। आर्थिक प्रतिबंध, परमाणु समझौते से अलग होना और लगातार सैन्य चेतावनियां इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका ईरान को लेकर किसी भी हद तक जा सकता है।
कुछ दिनों पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे इस्लामिक रिजीम विरोधी प्रदर्शनों को समर्थन देने की बात कही थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है और उनके साथ बेरहमी करती है, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
मध्य पूर्व हमेशा से अमेरिका की विदेश नीति का अहम हिस्सा रहा है। तेल, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों के कारण यह इलाका अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर अमेरिका को यह लगता है कि ईरान या उसके सहयोगी देशों से उसकी ऊर्जा सुरक्षा या सैन्य हितों को खतरा है, तो वह सीधी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका की लिस्ट में और कौन से देश
वेनेजुएला और ईरान के अलावा जिन देशों के नाम चर्चा में हैं, उनमें कुछ ऐसे देश शामिल हैं जो अमेरिका की नीतियों का खुलकर विरोध करते रहे हैं। इनमें ऐसे देश हो सकते हैं, जो अमेरिका के विरोधी गुटों के साथ खड़े हैं या जिनकी नीतियां अमेरिकी प्रभाव को कमजोर करती हैं।










