अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि गीता धार्मिक सीमाओं से आगे बढ़कर संपूर्ण मानवता को मार्गदर्शन देती है। उन्होंने इसे जीवन प्रबंधन, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति का सार्वभौमिक स्रोत बताया।
New Delhi: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने कहा कि श्रीमद् भगवद् गीता धार्मिक सीमाओं से परे है और यह धार्मिक जीवन, आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक स्पष्टता का सार्वभौमिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। उनके अनुसार, गीता की शिक्षाएं किसी एक धर्म तक सीमित नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं।
कुरुक्षेत्र में चल रहा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 15 नवंबर से कुरुक्षेत्र में आयोजित हो रहा है और यह 5 दिसंबर को समाप्त होगा। इस तीन सप्ताह के आयोजन में गीता के ज्ञान, अध्यात्म और भारतीय दर्शन को वैश्विक स्तर पर साझा करने का उद्देश्य रखा गया है। महोत्सव में देशभर से विद्वान, साधु-संत, नीति-निर्माता और आध्यात्मिक मार्गदर्शक शामिल हो रहे हैं।
गहन आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्रोत
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संदेश में कहा कि गीता की शिक्षाएं पीढ़ियों से लोगों के जीवन को प्रभावित करती आई हैं और बदलती दुनिया में यह ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान करती रहती है। उन्होंने कहा कि यह पवित्र ग्रंथ जीवन के संघर्षों में संतुलन, धैर्य, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक स्पष्टता प्रदान करता है। उनके अनुसार, गीता किसी भी देश, धर्म या समाज के लिए सीमित शिक्षाओं का ग्रंथ नहीं बल्कि मानव जीवन का कालातीत मार्गदर्शक है।
10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में संदेश का प्रसारण

जयशंकर का संदेश उस समय प्रसारित किया गया जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें गीता के अध्यायों, उसके दार्शनिक दृष्टिकोण और आधुनिक समय में उसकी उपयोगिता पर चर्चा की गई।
संयुक्त आयोजन में दिग्गजों की सहभागिता
यह आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में कई आध्यात्मिक नेता, विद्वान, हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री, सांसद नवीन जिंदल और गीता मर्मज्ञ स्वामी ज्ञानानंद महाराज शामिल हुए। सभी ने गीता के संदेश को आधुनिक संदर्भ में समझने और इसे वैश्विक स्तर पर फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ज्ञान, आस्था और संवाद का संगम
महोत्सव के दौरान गीता के विभिन्न अध्यायों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने बताया कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन प्रबंधन, नैतिकता और आध्यात्मिकता का मार्गदर्शक है। आयोजकों ने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य यह बताना है कि गीता की शिक्षाएं किसी विशेष जाति, पंथ या क्षेत्र की नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता की साझी धरोहर हैं।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि गीता की शिक्षाएं आज की युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। बदलते समय में करियर, जीवनशैली और मानसिक तनाव जैसे विषयों पर गीता का धैर्य, कर्म और आत्मज्ञान का संदेश बड़ी सहायता प्रदान करता है। आयोजकों ने बताया कि यह महोत्सव युवाओं को गीता के वास्तविक सार से जोड़ने का प्रयास है ताकि वे अपने जीवन में संतुलन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ सकें।









